मुफ़्तखोरी से वहनीयता तक: जनकल्याण की बेहतर दिशा
मुफ़्तखोरी से वहनीयता तक : जनकल्याण की बेहतर दिशा English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/03/from-freebies-to-affordability-better.html गुजरात में हाल की राजनीतिक बयानबाज़ी ने एक बार फिर मुफ्त सेवाओं की राजनीति को केंद्र में ला दिया है , खासकर जब अरविंद केजरीवाल ऐसे वादों पर ज़ोर देते नज़र आते हैं। यह मानने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि इन प्रस्तावों के पीछे मंशा जनता , विशेषकर आर्थिक दबाव झेल रहे वर्ग , की मदद करने की है। नीयत पर सवाल नहीं है। सवाल इस बात पर है कि क्या मुफ्त सेवाओं पर टिकी राजनीति लंबे समय में देश के लिए सही दिशा है। पहली नज़र में मुफ्त बिजली , पानी और अन्य सुविधाएं तुरंत राहत देती हुई दिखती हैं। और सच है कि कई परिवारों को इससे राहत मिलती भी है। लेकिन धीरे - धीरे यही मॉडल एक खतरनाक दूरी पैदा करता है — मूल्य और उपभोग के बीच। जब चीज़ें लगातार बिना कीमत के मिलती हैं , तो उनकी अहमियत घटती है और पू...