सच का खेल
सच का खेल जो सच में ताक़त होती है वो झूठ में कभी हो सकती नहीं जब झूठ टकराए सच से यहाँ तब झूठ से कोई बात हो सकती नहीं जो झूठ फैलाते हैं दुनिया में सच की पहचान उन्हें भी होती है जब सामने आके खड़ा हो जाता तब झूठ की लंका लग जाती है सच मौज में अपनी वो हर दिन चलता है झूम के दुनिया में दुनिया से जो नहीं डर सकता वो वैसा ही रहता हर पल में ये झूठ है जिसको दुनिया में छुपना पड़ता है डर डर कर हर महफ़िल में रंग बदल लेता मिलता दुनिया से डर डर कर हो सके तो झूठ को कह देना तेरे नहीं हैं कोई राज यहाँ हर क़दम पे तू यहाँ अलग दिखता तेरा तो नहीं है कोई भी जहाँ यहाँ झूठ की ताक़त है जो ये जब बार बार ये आता है लोग इसी को मानें सच अपना ये ऐसा दृश्य दिखाता है कुछ कायर हैं इस दुनिया में अपने को शेर बताते हैं जब आती है बात लड़ मरने की वो औरों के पीछे छुप जाते हैं एक राज बहादुर ने मुझसे कुछ ऐसी बातें कर डाली जब दुश्मन सामने आया था गीदड़ ने छलांग लगा ली थी इस झूठ के वादों से दुनि...