ख्वाबों का राम राज
ख्वाबों का राम राज By Rakesh Sharma This poem comes from my latest poetry book Ghutan/Suffocation (a must read for every familiy) जो रहते हैं अंगारों पे यहाँ उनका खुदा कहाँ होता जो जल जाते मेहनत करते अब उनका हिसाब कहाँ होगा इस देश के गद्दारों ने हमें मेरी अपनी मेहनत को लूट लिया हर दिन मैंने जलाया था खुद को एक झटके में ही छीन लिया इस राम की धरती पे रावण ना जाने कबसे रहता है ये आया राम का नाम लेकर अब रावण इसमें दिखता है रावण की तरह ये भी राजा कई तरह के भेष बदलता है अय्याशी करता है ये दुनिया में गरीबों को ये तंग करता है इसके मन में है द्वेष भरा ये नफ़रत करता है इंसानों से जो सच की तलाश में रहते हैं ये डरता है अब उन सबसे बच्चों का जीवन अब इसने यहाँ डाल दिया है खड्डों में अगर ज़ोर से तुम चिल्लाओगे यहाँ ये घुस जाएगा किसी बिल में जिनका छीना है धन इसने उस धन पे वो अभारी हैं उस धन से जीवन चलता उनका बिन उसके वो भिखारी हैं जब रावण राजा बन जाए जो राम के भेष में आया था तब विश्वास रहेगा ना किसी को क्या सच में राम कभी आय...