जब विदेश नीति प्रदर्शन बन जाए: कैसे भावनात्मक राष्ट्रवाद दुश्मनों को कमजोर करने के बजाय उन्हें और मजबूत बना देता है
जब विदेश नीति प्रदर्शन बन जाए : कैसे भावनात्मक राष्ट्रवाद दुश्मनों को कमजोर करने के बजाय उन्हें और मजबूत बना देता है English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/05/when-foreign-policy-becomes-performance.html विदेश नीति का मूल्यांकन भाषणों , टीवी डिबेटों या भावनात्मक नारों से नहीं होता। उसका मूल्यांकन परिणामों से होता है। किसी भी राष्ट्र को खुद से एक सीधा सवाल पूछना चाहिए : क्या उस नीति ने दुश्मन को कमजोर किया , या उसे फिर से संभलने और और मजबूत होने का मौका दिया ? पिछले दो दशकों में भारत का अनुभव रणनीतिक कूटनीति और भावनात्मक राष्ट्रवाद के बीच का अंतर साफ दिखाता है। आतंकवादी हमले कांग्रेस और बीजेपी , दोनों सरकारों के दौरान हुए। संसद हमला अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के दौरान हुआ। 26/11 मुंबई हमला डॉ . मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ। मोदी सरकार के वर्षों में भारत ने पठानकोट हमला , पुलवामा...