भारत एक और साल की राजनीतिक निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं कर सकता
भारत एक और साल की राजनीतिक निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं कर सकता https://www.youtube.com/watch?v=Xs_zklBjCkg English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/06/india-cannot-afford-another-year-of.html आज राहुल गांधी ने एक गंभीर दावा किया। उन्होंने संकेत दिया कि नरेंद्र मोदी के आसपास की व्यवस्था के भीतर बेचैनी बढ़ रही है और उनके अंदरूनी सूत्रों से मिल रहे संदेश यह बता रहे हैं कि सिस्टम में दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। अगर यह केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है , तो यह भी बाकी बयानों की तरह समय के साथ खत्म हो जाएगी। लेकिन अगर इसमें थोड़ी भी सच्चाई है , तो देश के सामने चुनावी राजनीति से कहीं बड़ा सवाल खड़ा है। फिर एक साल इंतज़ार क्यों ? अगर सिस्टम के भीतर बैठे प्रभावशाली लोग सच में मानते हैं कि भारत का आर्थिक भविष्य , लोकतांत्रिक संस्थाएँ और सामाजिक स्थिरता खतरे में हैं , तो चुप रहना अब तटस्थता नहीं है। चुप्पी अब साझेदारी है। जो लोग जानते हैं ...