लोकतंत्र घेराबंदी में: भारत का संकट अब सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि गणराज्य के भविष्य का है
लोकतंत्र घेराबंदी में : भारत का संकट अब सिर्फ एक पार्टी का नहीं , बल्कि गणराज्य के भविष्य का है English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/05/democracy-under-siege-indias-crisis-is.html हर लोकतंत्र एक ऐसे मोड़ पर पहुँचता है जहाँ नागरिकों को एक कठिन सवाल पूछना पड़ता है : क्या सत्ता अब भी जनता के हाथ में है , या धीरे - धीरे वह कुछ ऐसे राजनीतिक लोगों और संस्थाओं के हाथों में चली गई है जो अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहीं ? आज कई भारतीयों को लगता है कि देश उसी मोड़ की ओर बढ़ रहा है। लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता। अगर जनता की रक्षा के लिए बनी संस्थाएँ धीरे - धीरे सत्ता की रक्षा करने लगें , तो लोकतंत्र अंदर से कमजोर होने लगता है , भले ही बाहर से उसकी संरचना वैसी ही दिखाई दे। जब अदालतें , जांच एजेंसियाँ , मीडिया और संवैधानिक संस्थाएँ राजनीतिक रूप से प्रभावित दिखने लगें , तब लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ खतरे में पड़ जाता है।...