अंधों की दुनिया
अंधों की दुनिया आज मैंने देखा कुछ ऐसा , एक वीर ने आवाज़ लगाई थी। कौन विद्यार्थी है , कौन विश्वगुरु , उसकी परिभाषा बताई थी। कुछ लोगों को लगा ग़लत हुआ , जो इस नेता ने बताया था। जो विद्या ढूँढे हर पल यहाँ , विद्यार्थी उनको कहलाया था। जो ख़ुद को ज्ञान ही कहते हैं , उनसे बड़ा मूर्ख कोई भी नहीं। जो इनके पीछे चल देते , उनसे बड़ा मूर्ख कोई और नहीं। कुछ बातें सुन ली हैं किसी से , उनको लगता है सच हैं वो। जब कोई पूछे कहाँ से सुना , तब जवाब ना दे पाएँ किसी को। अंधकार में डूबी दुनिया में ये , ऐसे जीते हैं जैसे जन्नत है। एक ऐसा नेता यहाँ मिल जाता , लगता इनको वो ही सब कुछ है। अंधकार में जीने वालों को , कहीं सच से तुम ना मिला देना। रोशनी से जिनको यहाँ डर लगता , तुम उनको अपना ना समझ लेना। कहीं राम के नाम पे ये सब मिल के , सत्ता को तिलक लगाते हैं। फिर राम के नाम पे ये मिल के , ये ...