पंजाब को कभी नहीं भूलना चाहिए: फ़िल्म सतलुज को चुप नहीं कराया जाना चाहिए, बल्कि देखा जाना चाहिए।
पंजाब को कभी नहीं भूलना चाहिए: फ़िल्म सतलुज को चुप नहीं कराया जाना चाहिए, बल्कि देखा जाना चाहिए। English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/07/punjab-must-never-forget-why-movie.html हाल ही में मैंने सतलुज फ़िल्म देखी और मेरे मन में एक सवाल बार-बार उठता रहा इस फ़िल्म का इतना विरोध क्यों किया गया? यदि यह फ़िल्म पंजाब के 1980 और 1990 के दशक के उस काले दौर पर आधारित है, जब केंद्र और पंजाब दोनों में कांग्रेस की सरकारें थीं, तो आज किसी भी सरकार को इससे डरने की क्या आवश्यकता है? मेरे विचार से हर लोकतांत्रिक सरकार को इतिहास के कठिन अध्यायों को दबाने के बजाय लोगों को उनका सामना करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। लोकतंत्र अपनी गलतियों को छिपाने से नहीं, उनसे सीखने से मजबूत होता है। यदि कोई सरकार अतीत पर बनी एक फ़िल्म से डरती है, तो शायद उसे यह डर हो कि भविष्य में वर्तमान पर भी ऐसी ही फ़िल्म बन सकती है। मेरे लिए सतलुज केवल एक फ़िल्म नहीं है। यह मेरे अपने जीवन का देखा हुआ इतिहास है। आतंकवाद मेरे लिए अख़बार की खबर नहीं था, बल्कि रोज़मर्रा की सच्चाई थी। मेरे ए...