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भारत की संस्थाएँ जनता के गुस्से को कब तक अनदेखा कर सकती हैं?

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  भारत की संस्थाएँ जनता के गुस्से को कब तक अनदेखा कर सकती हैं ? English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/10/how-long-can-indias-institutions-ignore.html ९ अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की और चुनावों में कथित हेराफेरी तथा ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएँ सामने रखीं। राहुल गांधी के अनुसार , राष्ट्रपति ने सबूत माँगे और उनके आरोपों का खंडन नहीं किया। यह बैठक के बारे में राहुल गांधी का विवरण है ; इसे सरकार के विरुद्ध राष्ट्रपति का निष्कर्ष नहीं समझा जाना चाहिए। लेकिन यह मुलाक़ात अपने आप में दिखाती है कि यह टकराव कितना गंभीर हो चुका है। मेरी राय में , ऐसे समय में विपक्ष की बात सुनने से इनकार करना जनता के विश्वास को और चोट पहुँचाता। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली में प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति के लिए इन नेताओं की बात ...