राम एक बार फिर रावण को हरा सकते हैं
राम एक बार फिर रावण को हरा सकते हैं English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/07/ram-may-yet-defeat-ravan-again.html लोकतंत्र एक ही पल में नहीं मरता। वह धीरे-धीरे कमजोर होता है। पहले एक संस्था कमजोर होती है, फिर दूसरी, और अंत में वही संस्थाएँ, जिन्हें संविधान की रक्षा के लिए बनाया गया था, जनता का विश्वास खोने लगती हैं। इन संस्थाओं में सबसे महत्वपूर्ण न्यायपालिका है। अदालतों का काम सरकारों की रक्षा करना नहीं, बल्कि संविधान की रक्षा करना और जब भी सरकार संवैधानिक सीमाएँ पार करे, तब नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है। आज बहुत से भारतीय मानते हैं कि यह संतुलन कमजोर पड़ गया है। चाहे यह धारणा पूरी तरह सही हो या नहीं, लेकिन जब लाखों लोग न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने लगें, तो हर लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले व्यक्ति को चिंतित होना चाहिए। जब जनता एक साथ अदालतों, चुनाव आयोग और मीडिया पर भरोसा खोने लगे, तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है। ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं जिन्होंने इस अविश्वास को बढ़ाया है। एक न्यायाधीश के घ...