जब गुंडे “सनातन योद्धा” बन जाएँ, तो क्या वह सनातन रह जाता है?
जब गुंडे “सनातन योद्धा” बन जाएँ, तो क्या वह सनातन रह जाता है? English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/09/when-thugs-become-sanatan-warriors-is.html मैंने सनातन को हमेशा धर्म, करुणा, सत्य और न्याय की परंपरा के रूप में माना है। लेकिन आज मैं एक ऐसा सवाल पूछने पर मजबूर हूँ जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी क्या हमें सनातन को उन लोगों से वापस लेना होगा जिन्होंने राजनीतिक रूप से उस पर कब्ज़ा कर लिया है, या फिर सभ्य लोगों को इनके बनाए हुए सनातन को ही छोड़ देना चाहिए? मैं इनके सनातन को अपना सनातन मानने से इनकार करता हूँ। सनातन का अर्थ अपने पिता के लिए न्याय माँग रही 14 साल की बच्ची को धमकाना नहीं हो सकता। दलितों, अल्पसंख्यकों, छात्रों या अपने से कमज़ोर किसी व्यक्ति को डराकर फिर धार्मिक नारे लगाना धर्म नहीं हो सकता। धर्म की बात करने वाली परंपरा गुंडागर्दी का लाइसेंस सिर्फ इसलिए नहीं बन सकती कि गुंडे के हाथ में सही राजनीतिक झंडा है। बिलकिस बानो का मामला देखिए। बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या के दोषी ग्यारह लोगों को गुजरात सरक...