गीता का सबक/Geeta Kaa Sabak
गीता का सबक जब खुद से मोहब्बत हम करते तब खुद को देख न पाते हम जब दर्द बढ़े बढ़ जाते हैं फिर औरों में खुद को ढूँढे हम गीता में कहा है कर्म करो फल खुद ही तुम्हें मिल जाएगा अगर बूरा कर्म करता है कोई वो खुद ही बहुत पछताएगा जब जगह जगह पे देखें हम चोरों ने दुनिया को लूटा है ये बूरे कर्म सब करते हैं फिर खुदा को क्यों नहीं दिखता है क्या गीता में सब झूठ है ये जो हमको पढ़ाया जाता है हम अच्छे कर्म करते हैं सब पर उसका क्या यहाँ फ़ायदा है लाखों बच्चों ने मेहनत की कुछ ख़्वाब लिए थे उन सबने चोरों ने उन सबको लूट लिया क्या खुदा के नहीं थे वो अपने क्या कमी थी उनके कर्मों में दरिंदों ने उनको नोच लिया हर सर खुदा के आगे उनका हर कदम पे वो झुकता ही गया ख़्वाबों के उनके दरिंदों ने अब ऐसी आग लगाई थी कुछ जल के राख बने उससे औरों के लिए तन्हाई थी गीता के कुछ ऐसे मोड़ यहाँ कहीं कर्म को आगे करते हैं कहीं गर्दन काट दो चोरों की वहाँ उसकी हिमायत करती है इंसानों को ये समझ नहीं रावण भी बदल भेष आया था सीता का ...