जब गुंडे कानून से डरना बंद कर दें, तो लोकतंत्र के सामने उससे भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है
जब गुंडे कानून से डरना बंद कर दें, तो लोकतंत्र के सामने उससे भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/09/when-goons-stop-fearing-law-democracy.html भारत में शायद अब किसी नए आपातकाल की कागज़ पर औपचारिक घोषणा करने की जरूरत ही नहीं है। मेरी नज़र में भाजपा सरकार के तहत एक खामोश आपातकाल पहले से लागू है विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों, संस्थाओं पर दबाव, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक संरक्षण का दावा करने वाले लोगों द्वारा पैदा किए गए डर के जरिए। मोदी और शाह संसद, अदालतों, चुनावों और पुलिस थानों की ओर इशारा करके कह सकते हैं कि लोकतंत्र सामान्य रूप से चल रहा है। देखने में सब कुछ काम कर रहा है। असल सवाल यह है कि यह व्यवस्था काम किसके लिए कर रही है। स्वतंत्र भारद्वाज का मामला इसी सवाल को सामने लाता है। एक वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आज़ाद के पिता संजय कुमार पर हमला करने की शेखी बघारी और दावा किया कि उसके राजनीतिक संबंधों ने उसे जेल जाने से बचाया। उसने ...