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सच का खेल

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  सच का खेल     जो सच में ताक़त होती है वो झूठ में कभी हो सकती नहीं जब झूठ टकराए सच से यहाँ तब झूठ से कोई बात हो सकती नहीं   जो झूठ फैलाते हैं दुनिया में सच की पहचान उन्हें भी होती है जब सामने आके खड़ा हो जाता तब झूठ की लंका लग जाती है   सच मौज में अपनी वो हर दिन चलता है झूम के दुनिया में दुनिया से जो नहीं डर सकता वो वैसा ही रहता हर पल में   ये झूठ है जिसको दुनिया में छुपना पड़ता है डर डर कर हर महफ़िल में रंग बदल लेता मिलता दुनिया से डर डर कर   हो सके तो झूठ को कह देना तेरे नहीं हैं कोई राज यहाँ हर क़दम पे तू यहाँ अलग दिखता तेरा तो नहीं है कोई भी जहाँ   यहाँ झूठ की ताक़त है जो ये जब बार बार ये आता है लोग इसी को मानें सच अपना ये ऐसा दृश्य दिखाता है   कुछ कायर हैं इस दुनिया में अपने को शेर बताते हैं जब आती है बात लड़ मरने की वो औरों के पीछे छुप जाते हैं   एक राज बहादुर ने मुझसे कुछ ऐसी बातें कर डाली जब दुश्मन सामने आया था गीदड़ ने छलांग लगा ली थी   इस झूठ के वादों से दुनि...

एक समझौता-शुदा प्रधानमंत्री और वह कीमत जो भारत से वसूली जा रही है

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  एक समझौता - शुदा प्रधानमंत्री और वह कीमत जो भारत से वसूली जा रही है Watch this Video: https://www.youtube.com/shorts/BEiDWjgQze4 English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/02/a-compromised-prime-minister-and-price.html यह कोई साधारण व्यापारिक समायोजन नहीं था। यह पाँच लाख करोड़ डॉलर ( आधा ट्रिलियन डॉलर ) का व्यापार समझौता था भारत द्वारा अमेरिका के साथ किया गया अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक करार। इस स्तर के समझौते केवल व्यापार नहीं बदलते , वे दशकों तक यह तय करते हैं कि कौन बचेगा और कौन खत्म होगा , और किसी देश को दीर्घकालिक निर्भरता में बाँध देते हैं। किसी भी कार्यशील लोकतंत्र में ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर से पहले संसद में खुली बहस , सरकार और विपक्ष दोनों की समीक्षा , और जनता के सामने स्पष्ट विवरण अनिवार्य होता है। यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। यह समझौता संसद में किसी गंभीर चर्चा के बिना , देश के सामने कोई श्वेत पत्र रखे बिना , और चुने हुए ...