जब पत्रकारिता अपना मालिक चुन ले, तो सच उसकी पहली बलि बन जाता है
जब पत्रकारिता अपना मालिक चुन ले, तो सच उसकी पहली बलि बन जाता है English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/08/when-journalism-chooses-its-master.html अमेरिका में फॉक्स न्यूज़ के आने से पहले मुझे याद नहीं कि मैंने जानबूझकर पक्षपाती टेलीविज़न समाचारों के बारे में कभी इतनी गंभीरता से सोचा हो। फॉक्स न्यूज़ ने इस समीकरण को बदल दिया। उसने एक शक्तिशाली व्यावसायिक मॉडल खोज लिया अपना वैचारिक दर्शक वर्ग पहचानो, समझो कि वह पहले से क्या मानता है, ऐसे टिप्पणीकार बुलाओ जो उन्हीं मान्यताओं को मजबूत करें और फिर समाचार के साथ राय को इस तरह मिला दो कि दोनों के बीच की रेखा धुंधली हो जाए। आखिर दर्शकों की मान्यताओं को लगातार चुनौती देकर उन्हें खोने का जोखिम क्यों उठाया जाए, जब वही सुनाकर जो वे सुनना चाहते हैं, रेटिंग कहीं बेहतर मिल सकती है? मेरी नज़र में भारत में जिसे बाद में “गोदी मीडिया” कहा जाने लगा, उसने इस मॉडल को बहुत अच्छी तरह सीख लिया बस यहाँ राजनीतिक सत्ता की नज़दीकी का अतिरिक्त लाभ भी जुड़ गया। राय आधारित पत्रकारिता में अपने आप में कुछ गलत नहीं है। हर पत्रकार, ले...