जब झूठे आरोप चुनावों को आकार देते हैं, तो लोकतंत्र इसकी कीमत चुकाता है
जब झूठे आरोप चुनावों को आकार देते हैं , तो लोकतंत्र इसकी कीमत चुकाता है English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/02/when-false-charges-shape-elections.html हाल ही में अदालत ने 23 लोगों को, जिनमें अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया शामिल हैं, बरी किया। यह केवल एक कानूनी फैसला नहीं है। यह उस बात की पुष्टि है जो बहुत पहले स्पष्ट हो जानी चाहिए थी भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं थे। सालों तक जनता को बताया गया कि ये लोग भ्रष्ट हैं। गिरफ्तारियों को बार-बार प्रसारित किया गया। मीडिया के मंचों पर एक ही तर्क दोहराया गया: अगर ये अभी भी जेल में हैं, तो ज़रूर दोषी होंगे। इस तर्क ने जनमत को आकार दिया। जेल को सबूत बना दिया गया। जमानत न मिलना दोष की पुष्टि बना दिया गया। देरी को अपराध की गंभीरता का प्रमाण बताया गया। इसी दौरान न्यायिक टिप्पणियाँ मामले की मजबूती पर सवाल उठा रही थीं। अदालतें सबूत मांग रही थीं। फिर भी जमानत नहीं दी गई। आरोपों को साबित करने लायक ठोस प्रमाण अदालत में पेश नहीं किए गए, फिर भी स्वतंत्रता छीनी गई। जनता ने कानूनी बा...