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यदि कोई प्रमाण नहीं माँगेगा, तो हर झूठ इतिहास बन जाएगा

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  यदि कोई प्रमाण नहीं माँगेगा , तो हर झूठ इतिहास बन जाएगा English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/07/if-nobody-asks-for-proof-every-lie.html मेरी पत्नी उस शाम मुझसे काफ़ी नाराज़ थीं। सच कहूँ तो मैं उन्हें दोष नहीं दे सकता। उन्होंने कई दिनों तक मेहनत करके हमारे घर पर एक छोटी-सी पार्टी का आयोजन किया था। तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए, मिठाइयाँ तैयार कीं और इस बात का पूरा ध्यान रखा कि आने वाले सभी मेहमान एक सुखद और यादगार शाम बिताएँ। उद्देश्य केवल इतना था कि मित्र मिलें, बातें करें, हँसें और कुछ अच्छा समय साथ बिताएँ। शाम का अधिकांश हिस्सा बिल्कुल वैसा ही बीता। लेकिन बीच में कहीं बातचीत राजनीति की ओर मुड़ गई। और जैसा कि आजकल अक्सर होता है, चर्चा धीरे-धीरे विचारों का आदान-प्रदान कम और बिना प्रमाण के किए जाने वाले दावों का मंच अधिक बन गई। कुछ लोग कुछ नेताओं को नीचे दिखाने के लिए ऐसे ऐतिहासिक दावे कर रहे थे जिनका कोई प्रमाण उनके पास नहीं था, जबकि दूसरे नेताओं को इस प्रकार महिमामंडित किया जा रहा था मानो आधुनिक भारत का निर्माण अकेले उन्हीं ने कि...

If Nobody Asks for Proof, Every Lie Becomes History

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  If Nobody Asks for Proof, Every Lie Becomes History Hindi Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/07/blog-post_25.html My wife was quite upset with me after a gathering we hosted at our home. I cannot really blame her. She had spent days planning the evening, preparing food, making sweets, and ensuring that everyone would have a wonderful time. It was meant to be a relaxed evening among friends, filled with laughter and good conversation. For most of the evening, that is exactly what it was. Then, somewhere in the middle of the gathering, the conversation drifted toward politics. Like many political discussions these days, it quickly stopped being a discussion and became a series of confident assertions. Historical claims were presented as unquestionable facts. Some political leaders were praised almost as if they alone had built modern India, while others were dismissed through quotations and stories that no one seemed able to verify. One guest confi...

क्या भाजपा अपने राजनीतिक निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है?

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क्या भाजपा अपने राजनीतिक निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है ? English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/07/has-bjp-reached-its-political-turning.html आरएसएस और भाजपा के बारे में मैंने जो बार - बार एक बात देखी है , वह यह है कि वे अक्सर अपने राजनीतिक विरोधियों पर उन्हीं कार्यों का आरोप लगाते हैं जिन्हें , मेरी राय में , बाद में स्वयं अपनाते चले जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो वे पहले किसी संभावित कदम का ठीकरा विपक्ष के सिर फोड़कर जनता की प्रतिक्रिया परखते हैं। यदि जनता उस विचार को अस्वीकार कर दे , तो वे उससे स्वयं को अलग कर सकते हैं। लेकिन यदि उन्हें लगता है कि उससे राजनीतिक लाभ मिलेगा , तो वे अंततः वही कदम उठा लेते हैं। वे भ्रष्टाचार समाप्त करने के वादे के साथ सत्ता में आए थे , लेकिन आज राजनीतिक चर्चाओं में सबसे अधिक उनकी अपनी सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप छाए हुए हैं। उन्होंने बार - बार श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपात...