चाय से शैंपेन तक: “साधारण नेता” की असाधारण यात्रा
चाय से शैंपेन तक: “साधारण नेता” की असाधारण यात्रा English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/05/from-chai-to-champagne-curious.html एक पुरानी कहावत है: जब शेर को खून का स्वाद लग जाता है, तो वह और खून मांगता है। आधुनिक राजनीति में यह भूख खून की नहीं होती। यह सत्ता, ऐशो-आराम, प्रचार और भीड़ की लगातार मिलती तालियों की भूख होती है। और आधुनिक भारत में शायद ही किसी नेता की कहानी उतनी आक्रामक तरीके से बेची गई हो जितनी नरेंद्र मोदी की। हमें बार-बार बताया जाता है कि वे एक गरीब परिवार से आए। चाय बेची। उनकी माँ दूसरों के घरों में बर्तन धोती थीं। यह सब शायद सच भी हो। आज़ादी के बाद का भारत गरीबी से जूझ रहा था और करोड़ों परिवार संघर्ष में जी रहे थे। लोगों ने स्वाभाविक रूप से सोचा कि गरीबी से निकला व्यक्ति सादगी से शासन करेगा। वह सार्वजनिक धन की कीमत समझेगा। उसे पता होगा कि महीने के अंत तक किसी तरह घर चलाना क्या होता है। लेकिन भारत ने कुछ और ही देखा। जिस व्यक्ति ने सादगी की छवि बेची, उसने तमाशे की राजनीति को कला बना दिया। प्राइवेट जेट। विशाल प्रचार अभियान। ...