लोकतंत्र पर संकट: चुनावी हेरफेर और संस्थागत चुप्पी के गंभीर आरोप
लोकतंत्र पर संकट: चुनावी हेरफेर और संस्थागत चुप्पी के गंभीर आरोप English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/04/democracy-under-strain-allegations-of.html भारत एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। हर चुनाव के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता कमजोर होती दिख रही है किसी एक गलती की वजह से नहीं, बल्कि उन लगातार सामने आ रहे गंभीर आरोपों के कारण, जो चुनावी प्रणाली की नींव को ही हिला देते हैं। एक बार फिर सत्तारूढ़ पार्टी पर यह आरोप लगे हैं कि वह चुनावी फायदा उठाने के लिए संदिग्ध तरीकों का इस्तेमाल कर रही है खासतौर पर उन राज्यों में, जहां वह राजनीतिक रूप से कमजोर है। आरोप है कि बड़े पैमाने पर फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ा जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की इच्छा को जानबूझकर प्रभावित करने की कोशिश है। लेकिन असली चिंता सिर्फ आरोप नहीं हैं बल्कि उन संस्थाओं की चुप्पी है, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। चुनाव आयोग, जिसे संविधान ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की ...