एक स्वच्छ भारत या एक सुविधाजनक भ्रम?
एक स्वच्छ भारत या एक सुविधाजनक भ्रम? English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/04/a-clean-india-or-convenient-illusion.html भारत बहुत बदला है कम से कम ऊपर से देखने पर तो यही लगता है। शहर ऊँचे हो गए हैं, तकनीक हर जगह पहुँच गई है, और देश की महत्वाकांक्षा पहले से कहीं ज़्यादा दिखाई देती है। लेकिन कुछ चीज़ें हैं जो न इमारतों से बदलती हैं, न नारों से। सड़कों पर कदम रखते ही सच्चाई सामने आ जाती है जहाँ-तहाँ फैला कचरा, बिना सोचे-समझे फेंका गया प्लास्टिक, और एक ऐसी व्यवस्था जिसने मानो इसे सामान्य मान लिया हो। जब नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की, तो लगा कि आखिरकार इस समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। पहली बार लगा कि देश के सबसे ऊँचे स्तर पर सफाई की बात हो रही है। उम्मीद जगी और ऐसी उम्मीद जो लोगों को यह विश्वास दिलाए कि बदलाव संभव है। लेकिन सिर्फ उम्मीद से देश साफ नहीं होते। क्योंकि सफाई इरादों से नहीं, व्यवस्थाओं से आती है। और यही वह जगह है जहाँ बात टूट जाती है। देश के कई हिस्सों में कूड़ेदान हैं ही नहीं। जहाँ हैं, वहाँ भरे हुए या बदहाल हालत में...