जब मीडिया मर गया: कैसे पत्रकारिता सरकार की ढाल बन गई
जब मीडिया मर गया: कैसे पत्रकारिता सरकार की ढाल बन गई English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/08/when-media-becomes-governments-shield.html तथाकथित गोदी मीडिया इतना बेशर्म हो चुका है कि वह खुले तौर पर सरकार के बचाव में उतरता हुआ दिखाई देता है। जब पत्रकारों को उनके दोहरे मापदंडों के लिए जनता घेरती है, तो कुछ समय के लिए उनकी आवाज़ धीमी पड़ जाती है, लेकिन थोड़े समय बाद वही पुराना नैरेटिव लेकर फिर वापस आ जाते हैं। फिर यही लोग हैरान होते हैं कि भीड़ में जनता उन्हें पहचानकर सवाल क्यों पूछती है, उनका विरोध क्यों करती है और कभी-कभी उन्हें वहाँ से जाने के लिए क्यों कहती है। भीड़ में जरा-सा धक्का लग जाए तो उसे जनता द्वारा दुर्व्यवहार बताकर माफी माँगने की माँग शुरू हो जाती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मीडिया के कुछ लोगों की चमड़ी उन राजनेताओं से भी अधिक नाज़ुक हो जाएगी जिनसे सवाल पूछना उनका काम है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस का भाषण दिया, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता वहाँ उपस्थित नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण चाहे...