गद्दारों का जमघट (by Rakesh Sharma)

 गद्दारों का जमघट

Face of Corruption                                            Facilitator of Corruption

तेरह साल पहले कुछ ठगों ने बनाई कहानी, 

एक मूर्ख को पकड़ा शुरू कर दी लूटने की प्लानिंग। 

पहले एक ईमानदार सरकार का मजाक बनाया, 

कुछ चोरों की वजह से उस सरकार को बदनाम कराया। 

वादा किया काला धन लाएंगे विदेशों से सारा, 

पंद्रह लाख भर देंगे खजाने में तुम्हारा। 

बड़े झूठे वादे इन्होंने किए ऐसे, 

झांसे में इनके सब लोग फंस गए वैसे। 

करप्शन का चार्ज प्लस झूठे वादों ने मचाई तबाही, 

वोटर्स ने प्रोग्रेसिव अच्छी चलती सरकार हराई। 

खत्म करेंगे करप्शन के वादे से लूटने का प्लान बनाया, 

वोटर्स को जो वादे किए थे उनको फिर जुमला बताया। 

गरीबों के पैसों से अमीर दोस्तों का लोन माफ करवाया।

नोटबंदी से अपने दोस्तों का काला धन सफेद करवाया। 

गरीबों को लाइन में लगवा कर उन्हें मरवाया, 

करप्शन को लीगलाइज करने का प्लान बनाया। 

कंपनियों से इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए से पैसा अपने खाते में डलवाया, 

मना जिसने किया उसे खूब हड़काया। 

ED, CBI और IT से खूब डराया, 

"इलेक्टोरल बॉन्ड से लिया हुआ पैसा खूब छिपाया।

"जब सुप्रीम कोर्ट ने इनको खूब हड़काया, 

तब SBI ने इनका सारा भेद बताया। 

पता चला कि दिल्ली शराब घोटाले का सारा पैसा BJP के खजाने में आया, 

फिर भी सारा आरोप आम आदमी पार्टी पे लगाया।"

"करप्शन हटाओ वाला अन्ना अब दिखता नहीं है, 

करप्ट लोगों को ढूँढो तो वह दिखता वहीं है।"

पैसे के नशे में तोड़ी सब मर्यादा। 

विपक्ष वालों के रास्ते में डाली सब वाधा, 

खुद अपने लिए लाखों का सूट सिलवाया। 

इस चाय बेचने वाले ने देश का अच्छा मजाक बनाया, 

इस चौथी पास चाय बेचने वाले राजा के हुये कई दीवाने। 

राम नाम के नाम लेकर करते ये बहाने, 

आहिस्ता आहिस्ता से यह लूटने लगे देश के सारे खजाने।

यारों में सब बांटने लगे देश की यह कमाई, 

अंध भक्त सब कहने लगे यह सब ठीक है भाई। 

इन गद्दारों से लेना होगा इस देश को हिसाब, 

खोल कर इनके मुंह पे मारने पड़ेगी करप्शन की किताब। 

फिर पूछेंगे उस गोदी मीडिया से इनका हिसाब, 

कहां थे तुम गद्दारो जब तुमने दिया इनका साथ। 

इनकी गद्दारी में तुम भी उतने ही भागीदारी हो, 

जब जेल में जायें यह तुम जाओ साथ तुम इनके दरबारी हो।


By 

Rakesh K Sharma

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