मोदी का बुरा सपना (by Rakesh Sharma)
मोदी का बुरा सपना
चार सौ का नारा देकर, मोदी पहुंच गए प्रचार में,
जनता का जब गुस्सा देखा, फंस गए बीच मझधार में।
इलेक्टोरल बॉन्ड्स से जो पैसा लुटा, बांट रहे हैं
अनजाने में,
बीच प्रचार में लोग उठ कर चल दिए, मजा दिखाया जाने
में।
चिल्लाए मोदी स्टेज के ऊपर से, "कहाँ जा रहे
हैं ये सब लोग,
असली मिठाई तो खिलाई भी नहीं, ये डाल रहे हैं मेरा
भोग।"
कितना झूठ बोलोगे मोदी जी, दस साल में हम पक गए,
पंद्रह लाख का इंतज़ार करते करते, हाथ पाँव हमारे
थक गए।
पब्लिक के सवालों का जवाब कभी देते नहीं, सिर्फ
अंबानी अदानी से ही मिलते हो,
झूठे वादे करके हमसे, पैसा उनको देते हो।
अच्छे चाय बेचने वाले निकले, तुमने देश को बेच
दिया,
२ करोड़ नौकरियों का वादा देकर, उसको भी तुमने
फेल किया।
कहाँ हैं वो अच्छे दिन, जो अभी तक नहीं आए हैं,
महंगाई तो तिगुनी कर दी, गरीबों की संख्या बढ़ाई
है।
सौ रुपए का मुफ्त अनाज हमें देकर, 1175 रुपए चार्ज
करते हो,
इतनी चोरी कभी ने नहीं देखी, देश को धोखा देते
हो।
शर्म करो कुछ मोदी जी, कब तक झूठ बोलोगे,
मिठाई का जो बोले रहे हो, उसमें भी हमको पेलोगे।
जनता का गुस्सा देख कर, मोदी जी अब रोने लगे,
तीन गुना वादों की लड़ियों में, फिर से जनता को
पिरोने लगे।
एक दूसरे की तरफ देखा सबने, और हंसने लगे मोदी
पे,
यह झूठा आदमी कुछ भी कहेगा, चलो भैया इसे रोने
दो।
हार देख कर मोदी जी को, जेल का डर अब सताने लगा,
चार जून को याद कर के, मोदी बड़ा पछताने लगा।
यही सोच कर मोदी जी अब, क्या गुल खिलाएंगे,
चार जून से पहले किस किस को, जेल में भिजवाएंगे।
By
Rakesh K Sharma
4 जून का इंतजार करो सपने देखने का क्या फायदा
ReplyDeleteबीजेपी वालों की हालत खराब हो जाती है मोदी को जेल में सोच कर, टाइटल नहीं पड़ा कविता का, 'मोदी का बुरा सपना'। अगर सच हो गया, जिसके चांसेस 70% हैं, तब देखना।
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