चुनाव का दर्द

 

चुनाव का दर्द


कभी-कभी कुछ ऐसा भी हो जाता है, 

जो सोचा न था वो भी हो जाता है। 

 

जीतने वाला गिड़गिड़ा के रोता है, 

और हारने वाला खुशी से लोट-पोट हो जाता है। 

 

अचानक मोदी जी के साथ भी अब कुछ ऐसा ही हो गया, 

हंसना भी चाहते हैं, मगर बार-बार रोना आ गया। 

 

उधर राहुल मियाँ जी लगे हुए हैं अपने काम पे, 

आँखें खोल रहे हैं देश की अपने काम से। 

 

मोदी जी को डर लग रहा है कि अब 

कुछ कर न पाएंगे खुलेआम अदानी के लिए। 

 

छीन लेगा वो अब सब कुछ ये कहकर, 

"कमजोर हैं आप, नहीं जरूरत है मुझे तुम्हारी अपने लिए।" 

 

राम ने तो मुझे अयोध्या से ही निकाल दिया, 

जितना मैंने उनके लिए किया उसपे पानी डाल दिया। 

 

कैसे राम हैं आप जो इतना भी नहीं जानते, 

जो आपको लाए हैं आप उनको ही नहीं पहचानते। 

 

कहते हैं कि हम हैं जिससे ये सब आपको जानते हैं, 

बिना हमारे ये लोग आपको कहाँ पहचानते हैं। 

 

हमारे बिना तो आप लोगों के दिलों में रहते होते, 

जहाँ कोई न पूछता ना ही आपके कोई चर्चे होते। 

 

मोदी जी हैं जो पत्थर को भी भगवान बना देते हैं, 

मोदी जी तो एक चोर को भी महान बना सकते हैं। 

 

अब लगता है मोदी का थोड़ा सा अहंकार तो टूटा होगा, 

जब राम ने उन्हें अयोध्या में ही ऐसे लूटा होगा। 

 

लगता तो नहीं ये इंसान कभी भी कुछ सीखेगा, 

खुद को ही भगवान मानता है और जनता को खूब लूटेगा। 

 

हो सके तो बचना ऐसे लोगों से, 

जो राम के नाम से घुस आते हैं हर घर में धोखे से। 

 

_राकेश शर्मा_

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