साधु के भेष में कौन

 

साधु के भेष में कौन


ध्यान में मगन कौन, तुम खुद पहचानो साधु है या शैतान

 

 

साधु चोर नहीं हो सकता, दुनिया को बतलाते हैं, 

मगर जब चोर साधु के भेष में आ जाए, वो तो चोर कहलाते हैं। 

 

जो लोग चोरी से धन लाकर, और दुनिया से छुपाते हैं, 

वो लोग तो हर कीमत पर, चोर ही कहलाते हैं। 

 

इलेक्टोरल बॉन्ड की सारी स्कीम, मोदी जी ने निकाली थी, 

कंपनियों से चंदा लेकर, कैसे सारी दौलत छुपा ली थी। 

 

जब सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जानकारी, सारी जानकारी छुपा ली थी, 

समय लगेगा हमको कह कर, ऐसे कोर्ट को इन्होंने गाली दी। 

 

जान गए सब देशवासी, सारे राज़ इन चोरों के, 

झूठी जीत चुनाव में दिखा कर, चिल्लाने लगे ये ज़ोरों से। 

 

ध्यान भटकाना चाहते थे सबका, ताकि पूछ सके ना कोई,

दुनिया को मूर्ख बनाकर, करना इनको और काम ना कोई। 

 

जब पता लगा इनको, दूसरे ये सारे राज़ जान गए, 

मोदी जी व्यस्त हो गए, और नई तरकीब निकालने लगे। 

 

वोटिंग खत्म होने से पहले, मोदी ने दिया भक्ति पे ज़ोर, 

गोदी मीडिया वाले चिल्ला चिल्ला कर बोले, ये इंसान नहीं है चोर।

By

Rakesh K Sharma

Disclaimer: This poem is stating few facts and expressing the feelings of the public that feels cheated

Comments

  1. अफसोस है कि चोर वापस आ रहा है ।

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