शहीदों की पुकार

 

शहीदों की पुकार


भीड़ जाओ उन दीवारों से, जो रास्ते में आ जाती हैं 

टकरा जाओ उन लहरों से, जो बाधा बनकर आती हैं 

 

चीर दो उन खंडहरों को, जो दिन में भी दहशाती हैं 

पहचान लो अपनी ताकत को, जो किसी से नहीं घबराती है 

 

जीना हम उसको कहते हैं, जीने का मजा जब आता है 

हर खौफ से टकराने जाने में, यह दिल हमको कहलाता है 

 

असूलों पे चलने के लिए, खतरों से नहीं घबराता है 

सलाम मेरी है उस दिल को, जिसे जीने में मजा आता है 

 

उन कायरों से क्या कहना है, जो डर डर के ही जीते हैं 

खामोश रूहें हैं उन सब की, जो अपने लिए ही जीते हैं 

 

बर्बाद किया है उन सब ने, जो लोगों का लहू पीते हैं 

भिड़ जाना है हमको उनसे, खतरों के लिए ही तो जीते हैं 

 

खामोश करेंगे ये हमको, इतना तो गंवारा हमको ना है 

मर कर भी जियेंगे अब हम तो, इस दिल का इशारा इनको है 


By 

Rakesh K Sharma

This poem is dedicated to all past and present freedom fighters. I hope all those accused of unproven crimes held in jail will soon be let free in India. 

Comments

Popular posts from this blog

How We Turned an Abstract God into Concrete Hate

Distraction as Governance: How a Scripted National Song Debate Shielded the SIR Controversy

Superstitions: Where Do They Come From, and Why Do People Believe in Them?