देश की सच्चाई

 

देश की सच्चाई


जिस देश में पैदा होने से, कभी शर्म आया करती थी जिसको 

पीएम बना दिया देश ने उसे, फिर भी गँवारा नहीं है उसको 

 

ये पूजा करते हैं उसकी, और इल्जाम लगाते हैं हम पे 

तिरंगे को ऊँचा उठाया हमने, उस मान का है अभिमान हमको 

 

जिन्हें तीन रंगों का ज्ञान नहीं, वो तिरंगे की बातें करते हैं 

जिन्हें तिरंगे की असली पहचान नहीं, वो तिरंगे की दुहाई देते हैं 

 

ये तीन रंग जोड़ते हैं देश को, ये उसी देश को बांटते हैं 

ये शान समझते हैं इसमें, और कुछ भी कहने को इतराते हैं 

 

तिरंगे की तौहीन हुई उस दिन, जब आरएसएस ने इसे नकारा था 

साठ साल तक इस तिरंगे को, बार-बार ललकारा था 

 

आरएसएस की सोच वाला, इस देश का पीएम बनाया है 

सालों से तिरंगे को झुकाया था जिसने, इस देश ने उसे बड़ा बनाया है 

 

भगवान समझते हैं जिसको, वो देश को बिकवाता है 

ये कविताएं सच कहती हैं सब, इस सच को वो रुकवाते हैं 

 

जो डरते नहीं सच बोलने से, वो गुफाओं में जाकर छुपते नहीं 

साधु का भेष बनाकर वो, इस देश को कभी लूटते नहीं 

 

जब बस नहीं चलता है इनका, राम नाम का नारा लगाते हैं 

मेहनत से कमाई हुई दौलत को, बिना डकार किए खा जाते हैं 

 

_राकेश शर्मा_


Comments

  1. Agree with you totally. But sad to say the truth remains in written form with us or in our mind. I am not happy with the decision Indians have taken by not giving chance to Congress. I think they want more tears in their eyes and want India to suffer more 😭

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