जीवन की यादें

 

जीवन की यादें


कुछ पल का साथ इस जीवन में, 

यादें इतनी ये छोड़ गया। 

जिन राहों पे हम चलते थे, 

उन राहों का मुख मोड़ गया।

 

जीवन की इन गहराइयों में 

कुछ ऐसे वक्त भी आते हैं, 

जीने की वजह देते हैं जो, 

इस दिल के वो हो जाते हैं।

 

अंजान मोहब्बत के किस्से 

जब इस दिल से सुनवाते हैं, 

अंजान मोहब्बत के दरिया में 

वो खुद को रोक न पाते हैं।

 

जो महफ़िल दिल में सजाई थी, 

आशिक थे हम उस महखाने के, 

कोई रोक सका न था हमको 

उस महफ़िल में आने-जाने से।

 

जिंदा थे उस महफ़िल में सदा, 

मोहब्बत से जिसे संवारा था, 

हर पल जीवन में रहने का 

हमसे उनका ये वादा था।

 

पर वक्त की घड़ियाँ लंबी थीं, 

हमने ये कभी न सोचा था, 

इस वक्त के दायरे में रहना, 

ये वक्त का हमसे धोखा था।

 

जब ये राहें जुदा हुई उनसे, 

फिर वक्त को हमने याद किया, 

इस मोहब्बत से तुम्हें नफरत क्यों 

जो ऐसे हमें बर्बाद किया?

 

रहते हैं वो दिल की गहराइयों में, 

यादों का घूंघट पहने हैं, 

छू सकते नहीं अब हम उनको, 

सलामे मोहब्बत करते हैं।


© राकेश शर्मा




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