धर्म से राजनीति परेशान
धर्म से राजनीति
परेशान
जब देश परेशान हो जाता है,
नफरत की दुनिया में चला जाता है,
दुश्मन तब बलवान हो जाता है,
इंसान तब परेशान हो जाता है।
हिंदू-मुस्लिम का खेल जो अब
योगी ने छेड़ा है,
नफरत से भरा हर इंसान को,
इस देश को इन्होंने तोड़ा है।
साधु के भेष में योगी ने
राजनीति को ऐसे गुमराह किया,
लोगों ने समझा योगी को,
है सच्चा राजनेता इनको मिला।
इन लोगों को हिंदू ग्रंथों में
साधु कहलाने का हक नहीं,
साधु के भेष में अब इसको
राजनीति में रहने का हक नहीं।
अरे योगी इस राजनीति में,
समझो धर्म की नीति को,
जिस दिल में खुदा जब रहता है,
तुम ऐसा दर्द न दो उसको।
कोई हिंदू हो या हो मुस्लिम,
अरदास उसी को करते हैं,
हर दिल में खुदा को रख कर वो
हर इंसान से मोहब्बत करते हैं।
जब आ जाते हैं ऐसे लोग यहाँ
जो धर्म की राजनीति करते हैं,
धर्म के नाम ये एक-दूजे को
नफरत से ये भर देते हैं।
ऐसे इंसानों को जन्नत में
खुदा भी जगह नहीं देता है,
हर हरकत में वो उनकी सदा
हर पल का हिसाब वो लेता है।
दुनिया को धोखा देते हैं
कुछ भी बन जाते हैं पल में,
जनता से ताकत लेने को
कुछ भी ये बन जाते हैं।
जब धर्म राजनीति में मिल जाता
भला हो सकता किसी का नहीं,
ये आदी होते हैं खाने के,
पड़ता इनको कोई फर्क नहीं।
कावड़ यात्रा में योगी ने
अब धर्म की आग लगाई है,
इस देश में हर इंसान से अब
नफरत की भाषा दोहराई है।
जब आपस में तुम लड़ते हो
दुश्मन को देते हो मौका,
ताकत उसकी बढ़ जाती है
खुद को देते हो तुम धोखा।
सत्ता में रहने की खातिर
हर ईमान से धोखा करते हैं,
चाहे टूटे अब ये देश इनका,
सत्ता में रहना चाहते हैं।
अब पता चला है बॉर्डर पे
चीन ने डाले हैं कब्जे,
यात्री ऐसे नहीं जा सकते
मानसरोवर पहले जहां जाते थे।
जब देश को तोड़ोगे ऐसे
तो दुश्मन आंख दिखाएगा,
अगर ऐसे नेता रहेंगे इस देश में
फिर से ये देश टूट जाएगा।
कैसे समझाएं इस जनता को
जो धर्म की राजनीति में खोई है,
बर्बाद हो रहा है देश इनका,
नफरत की नींद में सोई है।
© राकेश शर्मा
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