धर्म रक्षा
धर्म रक्षा
ॐ शांति ॐ, शांति ॐ, शांति शांति शांति ॐ
जब सनातन में पूजा खत्म होती है और प्रसाद की तैयारी होती है, उससे पहले हम सब अंतिम प्रार्थना करते हैं जिसमें हम कहते हैं कि धर्म का प्रचार हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो। यह एक ऐसी प्रार्थना है जिसे हर सनातनी गर्व से कहता है कि देखो हम कितने महान हैं जो अधर्म का नाश चाहते हैं और विश्व का कल्याण चाहते हैं। लेकिन यही सनातनी तब मुंह फेर लेते हैं जब एक इंसान को इस लिए मार दिया जाता है कि वह दलित है और उसने एक पत्थर की मूर्ति को हाथ लगा दिया, या पानी के घड़े को छू लिया, या शादी के लिए घोड़ी पर चढ़ गया। यही लोग पूजा करते हैं उन अपराधियों की जिन्होंने एक मुस्लिम महिला का बलात्कार किया और उसकी 3 साल की बेटी को मार दिया, और इन अपराधियों को सम्मानित कर उनके गले में हार डाल दिए जाते हैं। वेदों में ऐसे लोगों को अधर्मी कहा गया है। ये ब्लॉग उन सोई हुई आत्माओं को जगाने के लिए लिखे जा रहे हैं, न कि नया धर्म शुरू करने के लिए। मैं समझता हूँ कि इससे अच्छा काम और क्या हो सकता है धर्म को बचाने के लिए जिसे पुजारियों ने मंदिरों में बेच दिया है। ऐ वैदिक सभ्यता के लोगो, जागो और अपनी सभ्यता को पढ़ो, जानो तुम कौन हो और कौन थे। तुम्हारी इन हरकतों से तो यह बिल्कुल नहीं लगता कि तुम अब सनातनी हो। तुमने अपने ही धर्म को नष्ट कर दिया ताकि तुम औरों को लूट सको। ऐसी सभ्यता तो हमने नहीं बनाई थी।जब तुम गांधी को गाली देते हो, तब तुम उस गांधी को गाली नहीं दे रहे जिसने फिर से शांति का पाठ पढ़ाने की कोशिश की, और उस सोई हुई अंग्रेज़ी आत्मा को जगाया कि वे जो अत्याचार कर रहे थे हिंदुस्तानियों पर, वह गलत था और इस बात को ज़्यादातर अंग्रेज़ समझ गए थे।
तुम्हें
गुस्सा आता है देश के टूटने का, तो ज़रा अपने इतिहास में जाकर देखो। यह देश कभी भी
एक नहीं था, जिसमें इतनी भाषाएँ बोली जाती हैं और विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं।
अगर किसी ने इस देश को एक बनाया था तो वह गांधी, नेहरू, पटेल और हज़ारों लोग थे जिन्हें
समझ आ चुका था कि एकता में ही बल है। ठीक है, जिन्ना को यह बात समझ नहीं आई और कुछ
देश के हिस्से बंट गए, फिर भी भारत एक बड़ा देश बना, जिसे तुम अब फिर से तोड़ रहे हो।
तुम्हारी समस्या धर्म नहीं, अधर्म है, जिसमें तुम खो चुके हो। और तुम्हारा नेता तुम्हें
उस आग में धकेल रहा है, और तुम आंखें बंद करके उसी आग में चल रहे हो। इस ब्लॉग के माध्यम
से मैं तुम्हें उस आग से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा हूँ, जिसे मैं धर्म बचाना समझता
हूँ। आगे आपकी मर्जी।
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