ट्रंप बोले भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है और ₹3 ट्रिलियन डर के मारे भाग गए

 

ट्रंप बोले भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है और ₹3 ट्रिलियन डर के मारे भाग गए

डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है। नाटकीय? हां। लेकिन ज़रा ध्यान दें कि इसके बाद क्या हुआ: उनकी सरकार की एक टैरिफ नीति ने भारतीय शेयर बाज़ार से ₹3 ट्रिलियन उड़ा दिए।

क्या इससे साबित हुआ कि भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है? नहीं। इससे यह साबित हुआ कि हालात उससे भी बदतर हैं   ये व्यवस्था इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि एक आदमी का फ़ैसला करोड़ों को झटका दे सकता है।

ट्रंप अर्थशास्त्री नहीं हैं। वो पेचीदगियों में नहीं उलझते। उनका खेल है नतीजे, दबाव और सुर्खियाँ। और जब वो बोलते हैं, बाज़ार हिलते हैं। क्योंकि वो जानते हैं राजनीति नहीं, नस पकड़नी होती है।

उन्होंने दबाया। भारत काँप गया।

यह केवल अमेरिका की ताक़त की बात नहीं है। यह उस कमज़ोरी की पोल खोलती है जो मोदी राज में भारत की आर्थिक हड्डियों तक पहुँच चुकी है।

एक दशक से ज़्यादा वक्त हो गया मोदी "उभरते भारत" की कहानी बेचते रहे।
हकीकत? देश की दौलत चुपचाप कुछ वफादार अरबपतियों की जेब में डाल दी गई। छोटे व्यापार कुचले गए, असंगठित अर्थव्यवस्था खोखली कर दी गई। नतीजा? एक ऐसा भारत जो प्रेजेंटेशन में चमकता है, लेकिन असलियत में एक झटका भी नहीं झेल सकता।

तो जब ट्रंप कहते हैं "भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है", वो कोई अंतिम फ़ैसला नहीं सुनाते।
वो एक चेतावनी गोली चलाते हैं। और चाहे वो ड्रामा हो या स्ट्रैटेजी, वो दिखा रहे हैं कि इस खोखले, कॉरपोरेट-भक्त सिस्टम को हिलाना कितना आसान हो चुका है।

अब शुरू हो गए गुस्से से भरे लेख, देशभक्ति वाले हैशटैग, और टीवी ऐंकर जो साँस नहीं ले पा रहे। लेकिन एक सेकंड रुकिए और सोचिए इतना चुभ क्यों रहा है? क्योंकि कहीं कहीं, हम जानते हैं कि उसने सही जगह मारा है।

भारत हर रोज़ अपनी IT सर्विस, यूनिकॉर्न स्टार्टअप और वैल्यूएशन की डींगे मारता है।
लेकिन ज़मीनी सच्चाई? लोकल इकॉनमी सिकुड़ रही है। असंगठित नौकरियाँ मर रही हैं। और करोड़ों छोटे व्यापारी जिन्हें नोटबंदी, GST की गड़बड़ी और पूंजीपति प्रेम ने बर्बाद कर दिया अब कहीं नहीं हैं।

सरकार अब अर्थव्यवस्था मज़बूत नहीं करती। सरकार अब सिर्फ अपने पसंदीदा उद्योगपतियों के पोर्टफोलियो मज़बूत करती है।

और आख़िरी झटका? वो असली भारतीय अर्थव्यवस्था जो नकदी, नेटवर्क और मेहनत से चलती है उसे कोई गिनता ही नहीं। लेकिन आज भी वही अनगिनत, अनौपचारिक इंजन भारत को चलाता है। ना कि सेंसेक्स, ना कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के भाषण।

तो नहीं, ट्रंप ने ये साबित नहीं किया कि भारत की अर्थव्यवस्था मर चुकी है। उन्होंने बस दिखा दिया कि चोट पहुँचाना कितना आसान हो चुका है।

उन्होंने एक बटन दबाया। अरबों उड़ गए। ये मौत नहीं है। ये कमज़ोरी है। और ये ट्रंप की गलती नहीं है।

ये हमारी बनाई हुई सच्चाई है।

मोदी राज का भारत मरा नहीं है, वो आर्थिक रूप से असंतुलित है, असुरक्षित है, और एक भ्रम का गुलाम बन चुका है।

और शायद, किसी ट्रंप जैसे बेलौस आदमी की ज़रूरत थी जो बाकी सबकी तरह चुप रहे, बल्कि वो आईना दिखा दे जिसे कोई देखने की हिम्मत नहीं करता।

 


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