वोट चोर गद्दी छोड़
वोट चोर गद्दी छोड़
तूफ़ानों से टकराने
की
पहचान बनाई है हमने।
गद्दारों से भिड़
जाने की,
पहचान बनाई है हमने।
मेरे वतन को
लूटें कैसे ये,
बर्दाश्त नहीं होता
है हमसे।
अब इनसे टकराना
है हमको,
ये बात चलायी
है हमने।
हर कदम-कदम
पे धोखे से,
नेता बन कर ये आते
हैं।
इस देश को ले जाएंगे
आगे,
ये झूठे गीत
सुनाते हैं।
हर गली-गली
में शोर मचा,
ये चौकीदार यहाँ
चोर है।
जिसको हमने था वोट दिया,
वो नेता कोई
और है।
चाहते हैं वापस
लें इससे,
जो इसने हमसे
छीना है।
जो ख़ज़ाना इसने
लूटा यहाँ,
उसका हिसाब इसे
देना है।
ये चौकीदार गद्दार निकला,
कभी हमने ये नहीं सोचा
था।
इस देश को देकर हाथ
इसके,
ये सबसे बड़ा
धोखा था।
जो अपनों का
कभी हो न सका,
वो हमारा अपना
हो जाए।
ये कैसी सोच
थी हमरी,
इस धोखे में
हम कैसे आ गए।
वोट चोर गद्दी
छोड़,
नारा गूंज रहा
इस देश में।
यहाँ हवा का रुख है
बदल चुका,
अब जनता आ गयी है
होश में।
Comments
Post a Comment