जागो भारत: लूट हो रही है दिन-दहाड़े
जागो
भारत: लूट हो रही है दिन-दहाड़े
राहुल गांधी, तेजस्वी
यादव और INDIA ब्लॉक के अन्य नेता सड़कों पर मौज-मस्ती करने नहीं निकले हैं। वे इसलिए
निकले हैं ताकि इस सोई हुई क़ौम को झकझोर सकें
ताकि आपको याद दिला सकें कि जब आप सो रहे हैं, आपका देश खुलेआम लूटा जा रहा
है। सवाल बहुत सीधा है: आख़िर कब जागेंगे आप और इस सड़ांध को महसूस करेंगे?
ज़रा ताज़ा नौटंकी पर
नज़र डालिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने अभी-अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तथाकथित डिग्रियों
पर फ़ैसला सुनाया है। याद है वो डिग्रियाँ? वही, जिन्हें बरसों पहले अमित शाह ने बड़े
गर्व से लहराया था, जैसे अतीत की धुंधली फ़ोटो कॉपीज़ सच का सबूत हों। लेकिन सच्चाई
सामने आने के बजाय मामला और धुंधला हो गया। फ़ैसले ने असली सवाल का जवाब नहीं दिया।
उल्टे, जनता सोचने पर मजबूर है: क्या हमारे न्यायाधीश भी इतने डरे हुए हैं or इतने समझौता कर चुके हैं that वे पीएम और उनके गुंडों का सच सामने रखने की
हिम्मत नहीं कर पा रहे?
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट
ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनमानी पर लगाम लगाने की कोशिश की थी, यह कहते हुए कि
विपक्ष पर अवैध छापे नहीं डाले जाएँ। और फिर क्या हुआ? एक ऐसा फ़ैसला, जो सीधे मोदी
के पक्ष में जाता है, आने के चंद घंटों के भीतर ही ED पहुँच जाती है आम आदमी पार्टी
के नेता सौरव भारद्वाज के घर। हमें कहा जाता है
“सिर्फ़ इत्तेफ़ाक़।” लेकिन असलियत? यह एक क्लासिक ध्यान भटकाने की चाल है:
बिहार में राहुल गांधी जहाँ लाखों लोगों को जुटा रहे हैं, वहाँ से कैमरे हटाकर विपक्ष
के ख़िलाफ़ गढ़ी गई “कांड” की ओर मोड़ दो।
यह शासन नहीं है। यह
तो भगवा चोले में लिपटा गुंडाराज है। और फिर भी, करोड़ों लोग ताली बजा रहे हैं। यही
वजह है कि INDIA ब्लॉक के नेता आपको आगाह कर रहे हैं: आज की चुप्पी कल की शर्म में
बदल जाएगी।
ज़रा सोचिए: एक दिन
आपके बच्चे और पोते-पोतियाँ आपसे पूछेंगे कि आप इतिहास के किस तरफ़ खड़े थे। वे पूछेंगे
कि जब आपकी लोकतंत्र की गला-घोंटाई हो रही थी, आप क्यों चुप रहे; क्यों आपने गोदी मीडिया
की हर ख़बर पर आँख मूँदकर भरोसा किया; क्यों आपने छापों, गिरफ़्तारियों और प्रोपेगैंडा
को सही ठहराया, जब वे आपके ही देशवासियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो रहे थे जो सत्ता से
सवाल पूछने की हिम्मत रखते थे। तब आप क्या जवाब देंगे?
इस शासन का समर्थन देशभक्ति
नहीं है। यह अपराध में साझेदारी है। और इतिहास साझेदारों को माफ़ नहीं करता।
तो हाँ, जागो। बहुत
देर होने से पहले जागो। जागो, इससे पहले कि आपके ही बच्चे आपको यह याद दिलाएँ कि बीजेपी
के अपराधों का समर्थन कर आपने केवल अपने विवेक से नहीं, बल्कि अपने देश से भी ग़द्दारी
की।
गद्दारों को पहचानो
कुछ लोग यहाँ
इस दुनिया में
जीते हैं आँखें बंद करके।
ये उनको बचाते रहते हैं
जो लूटें देश को खुल करके।
जिन्होंने देश
आज़ाद किया,
बदनाम करें ये उन सबको।
इन कायरों ने बर्बाद किया,
अब पता चला है हम सबको।
ये बातें करें
उस दुनिया की
ख़्वाबों में जो अच्छी लगती है।
औक़ात नहीं इनकी कुछ करने की,
जुमलों में वो दुनिया बसती है।
किसी अनपढ़ को
यहाँ खड़ा करके,
कहते हैं ये सब कुछ कर देगा।
नालियों में से निकली गैस से ये
सब के घर ये अब भर देगा।
ये ख़ुद को ख़ुदा
अब कहता है,
डरता है अपनी परछाईं से।
कोई ढूँढ न ले सब राज़ इसके
छुपा रखे हैं जो बड़ी मेहनत से।
हर क़दम क़दम
पर डरता ये,
कहता है वही जो कहते वो।
इस देश को खुल के लूटा है,
सब देता उनको जो कहते वो।
जो लोग इसे न
समझ पाए,
वो इसी के गीत सब गाते हैं।
लूटा है उन सबका देश इसने,
जुमलों में इसके रहते हैं।
कुछ पढ़े-लिखे
भी लोग यहाँ,
ये बात समझ न पाए हैं।
इसका है न कोई दीन-धरम,
फिर भी वो इसको चाहते हैं।
इस देश को कमज़ोर
बनाया इसने,
लूटा है इसने तुम सबको।
ये बात तुम्हें समझ नहीं आती,
तुम आकर पूछो ये मुझको।
ये दानव है हम
देख चुके,
ये क़ातिल है इंसानों का।
तुम कैसे इसको चाह सकते,
ये नेता है हैवानों का।
यहाँ झूठ के
महल बनाए इसने,
जिनमें ये रखता है तुम सबको।
जो बना था पहले से ही सब कुछ,
बनाया है इसने ये कहे तुमको।
इतिहास तुम ही
से पूछेगा,
क्या सोए थे इस दुनिया में।
कोई देश तुम्हारा था लुट रहा,
खोए थे तुम किस दुनिया में।
बच्चे भी तुमसे
पूछेंगे,
जब देखेंगे वो अपने घर को।
तुम किस दुनिया में खोए थे,
जब लुट रहे थे वो तुम सबको।
इस राम नाम में
कुछ न पड़ा,
ये सब कुछ क्यों नहीं समझे तुम।
सदियों से लुट रहे थे ये तुमको,
ना जाने मूर्ख क्यों थे तुम।
क्यों वैदिक
सोच को छोड़ दिया,
फँस गए तुम इनके जाल में सब।
ये भगवा पहन के आ गए थे,
तुमने समझ लिया इनको रब।
सालों से लुट
रहे हैं जो,
भगवा में बैठे ये सब साधु।
तुम इतना भी न जान सके,
जब इन्होंने किया था तुमको काबू।
संविधान ने तुमको
सिखाया था,
यहाँ ऊँच-नीच नहीं है कोई।
इन झूठे नेताओं के चक्कर में,
क्यों तुम सबने अपनी बुद्धि खोई।
जो नेता कहता
था सबको,
हूँ पढ़ा-लिखा मैं इंसान यहाँ।
डिग्री तो मैं नहीं दे सकता,
चाहे तुम लूट लो मेरा सारा जहाँ।
तुम फिर भी समझ
न पाए उसे,
एक झूठा, चोर, मक्कार है वो।
भगवा में बैठ के छुपता है,
इस देश का बड़ा गद्दार है वो।
आवाज़ लगा रहे
थे यहाँ कुछ तुमको,
जागो और उठ के देखो यहाँ।
वो लूट चुका है ये देश तेरा,
अब ढूँढ न पाओगे इसको यहाँ।
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