जुमलों का साम्राज्य: मोदी की इमारत अब हिलने लगी है

 

जुमलों का साम्राज्य: मोदी की इमारत अब हिलने लगी है

मैडम, कृपया हमें बचा लो।

https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/08/the-empire-of-jumlas-modis-house-of.html

राजनीति अब सच या सेवा का खेल नहीं रह गया है। यह अब धोखे की बाज़ीगरी और छवि की मैनेजमेंट का मैदान है। एक चतुर झूठ किसी को प्रधानमंत्री बना सकता है। और एक अड़ियल सच, किसी को ज़मीन पर ला पटक सकता है।

नरेंद्र मोदी की सत्ता में चढ़ाई किसी विचार या योजना की जीत नहीं थी। यह थी कॉरपोरेट रिश्वतखोरी, फूले हुए वादों, और टीवी स्टूडियो में पकेहिंदुत्वके ज़रिए लोकतंत्र का अपहरण। यह कोई जनआंदोलन नहीं था यह सत्ता की एक ब्राउन कॉलर तानाशाही की साजिश थी, जहाँ सफ़ेद अंग्रेज़ों की जगह अब देसी अरबपति राज कर रहे थे।

लेकिन जो इमारत झूठ और पक्षपात पर खड़ी हो, वह ज़्यादा दिन नहीं टिकती। और अब मोदी-शाह की गद्दी डगमगाने लगी है। कारण? RSS खुद अब परेशान है। वजह यह नहीं कि उन्होंने गलत नेता चुना बल्कि इसलिए कि अब वो नेता उनके कंट्रोल से बाहर हो गया है।

मोदी-शाह की सोच साफ थी हर चीज़ खरीदी जा सकती है। न्यायपालिका, मीडिया, वोटर, चुनाव आयोग... सबकी कीमत है। और इसी सोच के तहत देश की संपत्ति को गिने-चुने गुजराती उद्योगपतियों की जेब में डाला गया और इसे नाम दिया गयाविकास।हकीकत? यह एक जुआघर वाली अर्थव्यवस्था थी जिसमें प्रवेश करते समय सब अच्छा लगता है, पर बाहर निकलते ही जेब खाली हो जाती है।

और अब आते हैं राहुल गांधी जिसे ट्रोल आर्मी ने "पप्पू" कह कर ख़ारिज कर दिया था।
लेकिन पप्पू चुपचाप सीख रहा था। और अब जब वो लौटा है, तो जुमले नहीं, सबूत लेकर आया है।

नेहरू-गांधी परिवार पर चाहे जो बोलो, उन्होंने देश की नींव रखी थी। आज जिन संस्थानों को मोदी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इन्हीं लोगों ने बनाया था। अगर राहुल प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह चौथी पीढ़ी होंगे पर अब वो किसी विरासत से नहीं, तैयारी से रहे हैं।

और जो लोग अब भी सोचते हैं कि मोदी और शाह चुनावइमानदारीसे जीतते हैं जरा होश में आओ।
इन्हीं नेताओं ने अपने वादों कोजुमलाकहा था। मतलब वादा भी, धोखा भी और हँसी भी।

जब नीयत ही सत्ता पाने की हो, और वादों की जगह साज़िशें हों तो सत्ता टिकती नहीं, छीननी पड़ती है।
और यही उन्होंने किया भ्रष्ट नौकरशाहों, दबाव में झुकी न्यायपालिका, खरीदे हुए चैनलों, और झूठे नैरेटिव्स के ज़रिए। यह जीत नहीं थी यह एक घोटाला था।

अब राहुल तैयार हैं उस परदा उठाने के लिए। और मोदी-शाह? घबरा गए हैं। राष्ट्रपति से अलग-अलग मिल रहे हैं, जैसे दो मुजरिम कोर्ट पहुंचने से पहले जज से सौदा कर रहे हों।

क्यों मिल रहे हैं? इमरजेंसी लगवाने की बात चल रही थी? उपराष्ट्रपति का इस्तीफा तो ही गया। यह तक सुनने को मिला कि राष्ट्रपति ने भी इस्तीफा दिया था but CJI ने नामंज़ूर कर दिया। अगर यह सही है, तो कहानी इमरजेंसी से कहीं बड़ी हो चुकी है।

मोदी ने तो ED तक भेज दिया CJI के पीछे, ताकि सुप्रीम कोर्ट को भी झुकाया जा सके। मगर बात बनी नहीं।

अब राहुल ने चाल पलटी है INDIA गठबंधन की आपात बैठक बुलाई है, और वह सबके सामने है।
अब वो कोमल नहीं हैं। अब वो आग से आग खेल रहे हैं।

जो नौकरशाह अब तक BJP की सत्ता की नींव मजबूत कर रहे थे, वे अब रात में करवटें बदल रहे होंगे।
अगर राहुल के पास पक्के सबूत हैं और अगर मोदी-शाह सत्ता से बाहर होते हैं तो कई के लिए जेल अब सपना नहीं, हकीकत बनने जा रहा है।

यह अब छुपकर नहीं, खुलेआम लड़ा जा रहा युद्ध है। यह वही है जो एक सच्चे लोकतंत्र में होना चाहिए ताक़त की सीधी भिड़ंत।

आज की रात वॉटरगेट की भारतीय छाया लग रही है। अंतर बस इतना है यहाँ मामला बहुत ज़्यादा खुल्लम-खुल्ला है।

जो भी कल होगा, एक बात आज साफ़ है मोदी की अकड़ अब टूट चुकी है। अब NDA की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। बिहार चुनाव? अब आसान नहीं रहे। और यह राजनीतिक युद्ध? यह यहीं खत्म नहीं होगा। यह तो अब शुरू हुआ है।

 


Comments

Popular posts from this blog

How We Turned an Abstract God into Concrete Hate

Distraction as Governance: How a Scripted National Song Debate Shielded the SIR Controversy

Superstitions: Where Do They Come From, and Why Do People Believe in Them?