ब्रेकिंग न्यूज़: देश मांग रहा है मोदी की गिरफ्तारी, वाराणसी की जीत को बताया गया धोखा

 

ब्रेकिंग न्यूज़: देश मांग रहा है मोदी की गिरफ्तारी, वाराणसी की जीत को बताया गया धोखा

राहुल गांधी की बम की तरह गिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले तक, मोदी के कट्टर आलोचकों को भी अंदाज़ा नहीं था कि 2024 के आम चुनाव में मोदी कितने डरे हुए और बौखलाए हुए थे। लेकिन अब परदा हट चुका है और जो सामने आया है, वो नेतृत्व नहीं है। वो डर है। चालबाज़ी है। और सीधा-सीधा चुनावी धोखा है। सीधी बात करते हैं: ये कोई साधारण चुनावी गड़बड़ी नहीं थी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए सबूतों के अनुसार, भारत का चुनाव आयोग (ECI) खुद इस फर्जीवाड़े में शामिल था। गैरकानूनी वोटर्स को कई राज्यों में बैठाया गया। और इसमें प्रधानमंत्री मोदी की अपनी सीट वाराणसी भी शामिल है।

ये सिर्फ एक स्कैंडल नहीं है ये लोकतंत्र पर हमला है। और अगर इस देश में लोकतंत्र की थोड़ी भी इज़्ज़त बाकी है, तो मोदी की वाराणसी से जीत को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए आंकड़े सिर्फ आरोप नहीं हैं वे फर्ज़ीवाड़े को साबित करते हैं। नकली वोटर, फूले हुए वोटर लिस्ट, एक व्यक्ति के कई वोट, मरे हुए लोगों के नाम पर पड़े वोट ये किसी एक राज्य या घटना तक सीमित नहीं था। ये एक सोची-समझी, राष्ट्रव्यापी साज़िश थी। इसे इंजीनियर किया गया था।

और ये सब उस आदमी की नाक के नीचे हुआ या शायद उसी के आदेश पर जो खुद को "देश का चौकीदार" कहता है।

अगर चुनाव आयोग को लगता है कि ये आरोपसंदिग्धहैं, तो अब चुप्पी बंद करें और सच्चाई सामने लाएं। अपना डेटा जारी करें। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग लॉग्स, वोटर लिस्ट और बूथ-स्तर का डेटा विपक्ष, नागरिक समाज और स्वतंत्र विशेषज्ञों को दें। या फिर मान लें कि आपकी चुप्पी आपकी मिलीभगत है।

अब ये सिर्फ राहुल गांधी बनाम नरेंद्र मोदी नहीं है। अब ये सच और तानाशाही के बीच की लड़ाई है।

चुपचाप विरोध करने का वक्त खत्म हो चुका है। मैं विपक्ष के नेता से आग्रह करता हूँ कि हर उस व्यक्ति और संस्था के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज करवाई जाए, जो इस लोकतंत्र की डकैती में शामिल रही या उसे सहयोग दिया।

अब और देरी नहीं। अब भाषण नहीं FIR दर्ज करो। कानूनी कार्यवाही शुरू करो। नाम उजागर करो। गवाह बनाओ। जिन लोगों ने इस चुनावी अपराध में साथ दिया, उन्हें अब अपने आकाओं के खिलाफ बोलने पर मजबूर करो। जेल या सच उनके पास सिर्फ यही दो रास्ते बचने चाहिए।

हर राजनीतिक दल जो अब भी NDA के साथ खड़ा है, उसे खुद से पूछना चाहिए: हम भारत के लोकतंत्र के वफादार हैं या मोदी की धोखेबाज़ी के?

अगर लोकतंत्र को बचाना है, तो NDA को तोड़ना होगा टुकड़े-टुकड़े करके जब तक सिर्फ असली साज़िशकर्ता बाकी रह जाएं। राहुल गांधी, जिनके हाथ में अब पूरे देश का ध्यान है उन्हें अब चोट करनी चाहिए, जब लोहा गर्म है।

यह सिर्फ छीनी गई सीटों को वापस पाने की बात नहीं है। यह भारत की आत्मा को वापस पाने की लड़ाई है।

जनता देख रही है। इतिहास देख रहा है। और अगर कभी वो पल आया है जब असली नेतृत्व दिखाना हो तो वो पल अब है।

इंसाफ का समय गया है। बदले का नहीं जवाबदेही का। मोदी और शाह को अब जवाब देना होगा।
देश को दिखाओ, असली संविधान के रखवाले कौन हैं।


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