नौटंकी बाबा 75 के हुए: देश ने आँखें घुमाईं

 

नौटंकी बाबा 75 के हुए: देश ने आँखें घुमाईं

वो ग़ायब होने वाला खेल, जिसकी आदत अब देश को पड़ चुकी है।

English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/09/nautanki-baba-turns-75-country-rolls.html

तो आखिरकार वो भव्य तमाशा ही गया। नरेंद्र मोदी, जो खुद को भारत का उद्धारक और अपना ही ब्रांड एंबेसडर मानते हैं, 75 साल के हो गए। आमतौर पर जन्मदिन का मतलब होता है केक, हँसी और शुभकामनाएँ। लेकिन नौटंकी बाबा का जन्मदिन? हैशटैग, पुतले दहन और छात्रों की आवाज़ेंवोट चोर, गद्दी छोड़।

ग़ोदी मीडिया ने इसे आध्यात्मिक कार्यक्रम बनाने की पूरी कोशिश की एंकर practically मंत्रोच्चार करते हुए ऐसे रिपोर्टिंग कर रहे थे मानो खुद भारत का भाग्य इस दिन खुशियाँ मना रहा हो। लेकिन देश का बाकी हिस्सा? उतना उत्साहित नहीं था।

मोदी को उम्मीद थी कि 75 की उम्र तक पहुँचते ही लोग उनसे गिड़गिड़ाएँगे कि वो बीजेपी का 75 साल का रिटायरमेंट नियम तोड़ दें और अगले दशक तक गद्दी पर जमे रहें। हुआ इसका उल्टा। उनका जन्मदिन सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस के नाम से ट्रेंड हुआ। फूलों की जगह पुतले जलाए गए। अगर ये मोहब्बत है, तो नफ़रत कैसी होगी, ये सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

इधर राहुल गांधी का मशहूर हाइड्रोजन बम अब भी फ्रीज़र में पड़ा है। शायद राहुल रिमोट खो बैठे हैं, या फिर ग्रह-नक्षत्रों के सही बैठने का इंतज़ार कर रहे हैं। सुना है कि उनके सहयोगी जेल के डर से पास आने की हिम्मत नहीं कर रहे। या फिर शायद राहुल को समझ गया है कि भारत के न्यूज़ साइकल में आज का धमाका कल का मीम बन जाता है। जिस दिन वो बटन दबाएँगे, उसी दिन ग़ोदी एंकर बहस को घुमा देंगे कि बीजेपी प्रवक्ता की पैंट लाइव टीवी पर गिरी थी या भगवान की लीला थी।

भारतीय जनता पार्टी की सूचना प्रौद्योगिकी शाखा, जैसा अनुमान था, पीछे नहीं रही। हर हिंदी फ़िल्म अभिनेता, हर क्रिकेट खिलाड़ी, हर सेवानिवृत्त नेता सबकी समय-रेखा संदिग्ध रूप से एक जैसी “जन्मदिन मुबारक मोदी जी” पोस्टों से भर गई। ट्विटर पर तो मुस्कान चिपकी हुई दिखी, पर बाहर ग़ुस्से से तपता देश बेरोज़गारी और महँगाई से जूझ रहा था। यह विसंगति किसी कविता जैसी प्रतीत हो रही थी। यही वह प्रधानमंत्री हैं जिन्हें देश के इतिहास में पहली बार लोग आपदा के समय भी देखना नहीं चाहते। बाढ़, चक्रवात, भूकंप पहले प्रधानमंत्री आशा लेकर आते थे। और मोदी? वह कैमरे लेकर आते हैं। लोग टूटे हुए घर जोड़ना पसंद करते हैं, उनकी छायाचित्र-अवसर झेलना नहीं।

और फिर है उनका आसमान से इश्क़। ₹8,400 करोड़ के प्राइवेट जेट में उन्होंने देश की समस्याओं से ज़्यादा किलोमीटर उड़ानें भरी हैं। 35,000 फीट से मन की बात करना ही उनकी गवर्नेंस की परिभाषा है, जबकि ज़मीन पर प्याज़ ₹80 किलो बिक रहे हैं।

इतिहास में बाकी प्रधानमंत्री गरिमा के साथ याद किए जाते हैं। नेहरू: चाचा नेहरू। इंदिरा: आयरन लेडी। राजीव: आधुनिक भारत के विज़नरी। शास्त्री: जय जवान जय किसान। वाजपेयी: परमाणु शक्ति देने वाले। मनमोहन सिंह: उदारीकरण के शांत शिल्पकार। नरसिंहा राव: संकट को विकास में बदलने वाले सुधारक। और मोदी? वोट चोर। वो प्रधानमंत्री जिसने भारत का कर्ज़ चार गुना कर दिया, देश को अपने दोस्तों के हाथ बेच दिया, हर संस्था को भ्रष्ट किया, और फिर भी समस्याएँ हल करने से ज़्यादा समय कैमरे के सामने पोज़ देने में बिताया।

तो हाँ, नौटंकी बाबा 75 के हो गए। लेकिन जश्न फीका था, मोमबत्तियाँ मंद थीं, तालियाँ ग़ायब थीं। जन्मदिन वाले हैशटैग्स के पीछे छिपा है डर डर कि गद्दी खिसकने के बाद क्या होगा, जब सत्ता हाथ से जाएगी, जब जिसने खुद को व्यक्तित्व-पंथ में बदल लिया है वो अकेला दर्पण के सामने खड़ा होगा। जन्मदिन मुबारक, मोदी जी। देश ने ताली नहीं बजाई देश ने आह भरी।

 

मोदी 75 साल का हो गया

बड़ी देर से सोच रहा था,
मोदी को कुछ कहना है,
पचहत्तर साल के हो गए अब तुम,
मुबारकबाद देना बनता है।

नेहरू तुम बनना चाहते थे,
पर “वोट चोर” कहलाते हो।
जब जनता आती है सामने तेरे,
जल्दी से तुम छुप जाते हो।

इतना लोकप्रिय नेता है ये,
भारत ने कभी न देखा था।
लूटा खुलकर देश को जिसने,
पहले कभी न ऐसा देखा था।

अपने को बड़ा बनाना चाहता,
औरों को नीचा करता ये।
जब सच सामने आ जाता इसका,
ऊपर से नीचे गिरता ये।

इतना घमण्ड दिखाया इसने,
कि राम को भी ये भूल गया।
अब राम को छोटा कर इसने,
खुदा खुद को ही बना लिया।

जो खुद की तारीफ़ करे इतनी,
कुछ तो लगता यहाँ गड़बड़ है।
वोट चुरा कर जीता है ये,
सबको दिखता ये नकली है।

खुद को फ़क़ीर कहलाए अब ये,
लाखों के सूट में सजता है।
जहाँ डूब रही जनता इसकी,
दर्द अपना वहाँ पे रखता है।

बूढ़ी आँखों में जब इसकी,
जनता देखे आँसू इसके,
अपना दर्द भूल कर वो सारे,
आ जाते हैं सब पास इसके।

जो झूठ के महल सजाता हो,
पागलखाने में ले जाओ उसको।
उसे सच का ज्ञान ज़रूरी है,
जो हर पल तुम वहाँ दो इसको।

भारत का ये पहला प्रधान बना,
जिसे जन्मदिन पर भी गाली पड़ी।
पुतले भी जलाए जनता ने,
“तुम चोर हो” सबने इसे ये बात कही।


Comments

  1. Aap ne bhut acha likha h padh ke mja aa gya aap ne kya line likhi hai good job 👍

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