बीजेपी की गलती से निकली सच्चाई: नेशनल टीवी पर बेशर्मी और मूर्खता
बीजेपी की गलती से निकली सच्चाई: नेशनल टीवी पर बेशर्मी और मूर्खता
https://www.youtube.com/watch?v=qyjNNW0VJ9Q
English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/09/bjps-accidental-honesty-stupidity-on.html
राजनीतिज्ञ
कभी झूठ बोलते
हैं, कभी बच निकलते हैं,
और कभी-कभी गलती से
लाइव टीवी पर सच्चाई उगल
देते हैं। बीजेपी
का यही असली
टैलेंट है। हाल ही में,
एक बीजेपी नेता
से जब ईवीएम
हैकिंग पर सवाल पूछा गया
तो उन्होंने बड़े
आराम से कबूल कर लिया
कि हाँ, पार्टी
ने ईवीएम हैक
किया था। और सफाई? “तो
क्या हुआ? पिछले
70 साल से बाकी सब भी
तो कर रहे थे।” वाह!
चुनाव चोरी की स्वीकारोक्ति और बच्चों
जैसी सफाई "सब
कर रहे थे"। और
सबसे मजेदार बात
यह है कि अगर आप
शपथ के तहत नहीं हैं
तो देशद्रोह भी
बोल सकते हैं,
और उसे सिर्फ
“राजनीतिक बयान” कहकर
बच सकते हैं।
कितनी सुविधाजनक व्यवस्था
है!
यही
वजह है कि मोदी ने
कभी असली प्रेस
कॉन्फ्रेंस करने की
हिम्मत नहीं की।
जो लोग उन्हें
कंट्रोल करते हैं,
वे जानते हैं
कि ज़रा सा कठिन सवाल
पूछ लिया गया
तो मोदी या तो बीच
में उठकर चले
जाएंगे या सच उगल देंगे।
और सच मानिए,
उनके नाम की “Entire
Political Science” में मास्टर डिग्री
किसी भी यूनिवर्सिटी
में पढ़ाई ही
नहीं जाती। मोदी
कभी भी तुरंत
सोचकर जवाब देने
वाले नेता नहीं
रहे। वो वही रटते हैं
जो लोगों को
सुनना अच्छा लगे।
यह राजनीति नहीं,
यह नाटक है।
हाँ,
मोदी ने युवावस्था
में मुश्किलें झेली
थीं। दर्द, तकलीफ़,
भूख यह सब उनकी बनाई
हुई कहानी का
हिस्सा है। लेकिन
जिम्मेदारी सीखने के
बजाय उन्होंने दूसरा
रास्ता चुना: पत्नी
को छोड़ो, फ्रीबीज़
पकड़ो, और मेहनत
किए बिना सत्ता
की सीढ़ियाँ चढ़ो।
गुजरात में कॉरपोरेट्स
ने उनका ध्यान
रखा और दिल्ली
पहुँचने के बाद टैक्सपेयर्स ने उनके सारे शौक
पूरे किए। मुफ्त
खाना, मुफ्त सुरक्षा,
मुफ्त महल कुछ भी खुद
कमाने की ज़रूरत
नहीं पड़ी। एक
बार सत्ता के
इन ऐशो-आराम
का स्वाद चख
लिया तो भ्रष्टाचार
ही उनका कम्फर्ट
ज़ोन बन गया। असली हुनर?
झूठ बेचना, नफरत
को पैकेज करना,
और अपराध को
भगवा लिफाफे में
लपेट देना।
और
फिर आते हैं अमित शाह।
मोदी के सबसे बड़े बचावकर्ता,
जो आधे से ज़्यादा इंटरव्यू में
खुद को मूर्ख
साबित कर देते हैं। वे
खुलेआम मान चुके
हैं कि मोदी के चुनावी
वादे सिर्फ “जुमले”
थे। यानी कि साफ झूठ।
और मज़ेदार बात
यह है कि जब भी
वे विपक्ष पर
आरोप लगाते हैं
कि “70 साल में कुछ नहीं
किया,” तो असल में अपनी
ही सरकार की
नाकामी उजागर कर
देते हैं। क्योंकि
अगर पिछले 70 साल
में कुछ नहीं
हुआ, तो पिछले
दस साल मोदी
ने किया क्या?
ऐसी बेवकूफ़ाना ईमानदारी
बीजेपी को सरकार
से ज़्यादा कॉमेडी
शो बना देती
है।
असल
त्रासदी मोदी की नालायकी नहीं है,
बल्कि वे ताकतें
हैं जो उन्हें
कंट्रोल करती हैं।
उन्हें मोदी की हर कमजोरी,
हर असफलता और
हर गुनाह का
पता है। इसी वजह से
वे उन्हें सत्ता
में बनाए रखते
हैं। देश को विदेशी ताकतों
के हवाले करना
पड़े तो कोई दिक्कत नहीं।
कॉरपोरेट्स की हर
मांग पूरी करनी
पड़े तो हाज़िर।
असली मालिक डोर
हिलाते हैं और मोदी सिर्फ
कैमरे के सामने
हाथ हिलाते हैं।
इधर
बीजेपी नेता ऐसे
व्यवहार करते हैं
जैसे कोई नवाबी
हक़ लेकर पैदा
हुए हों। विपक्षी
नेताओं, महिलाओं और
धार्मिक हस्तियों पर
गालियाँ बरसाना उनका
शौक है। लेकिन
जब विपक्ष पलटवार
करता है तो गोदी मीडिया
दौड़कर उसे सेंसर
कर देता है।
मोदी और बीजेपी
की सुरक्षा अब
पत्रकारिता नहीं, बल्कि
पूरा टाइम प्रोपेगेंडा
बन चुकी है।
इसकी तुलना दिल्ली
के मुख्यमंत्री से
कीजिए, जो सवालों
का जवाब देती
हैं और नीतियों
पर बात करती
हैं। अगर वे किसी और
पार्टी से होतीं
तो अब तक जेल में
होतीं या राजनीति
से बाहर फेंकी
जा चुकी होतीं।
लेकिन जब उन्होंने
मान लिया कि ईवीएम हैकिंग
से चुनाव जीता
गया, तो यह गलती नहीं
बल्कि ईमानदारी थी।
वे जानती हैं
कि वे कैसे वहाँ पहुँचीं।
बीजेपी
में अगर एक ही नेता
है जो बिना बेइज़्ज़ती किए बोल सकता है,
तो वो राजनाथ
सिंह हैं। उनकी
बातें सुनकर लगता
है जैसे कोई
अनुभवी नेता बोल
रहा हो। लेकिन
यह शालीनता मोदी,
शाह और बाकी रिएक्शनरी क्लब में
दिखाई ही नहीं देती, जो
मूर्खता को राजनीति
और घमंड को ताक़त समझते
हैं।
तो
आइए जोड़कर देखें:
एक बीजेपी नेता
टीवी पर ईवीएम
हैकिंग कबूल करता
है, मोदी प्रेस
कॉन्फ्रेंस से इसलिए
भागते हैं क्योंकि
सच निकल सकता
है, अमित शाह
खुलेआम मानते हैं
कि मोदी के वादे सिर्फ
“जुमले” थे, और पूरी पार्टी
सिर्फ मीडिया प्रोटेक्शन
और कॉरपोरेट पैसों
के दम पर बची हुई
है। किसी भी असली लोकतंत्र
में इस स्तर की मूर्खता
राजनीतिक करियर खत्म
कर देती। भारत
में? यह बस एक और
मंगलवार है।
इन लोगों को तो नार्को टेस्ट की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी, अगर कोई सच्चा पत्रकार इनसे सवाल पूछे। क्योंकि इन्हें लगता है कि ये लोग अछूत हैं, कोई इन्हें छू नहीं सकता। लेकिन अगर इनसे मज़बूत और तीखे सवाल पूछे जाएं, तो ये खुद ही सारा सच उगल देंगे।
ReplyDeleteआपने ठीक कहा, दिल्ली की मुख्यमंत्री ने तो आसान सवालों में ही सच उगल दिया जबकि उसे तो अभी तक कोई दवाई भी नहीं दी गई थी। मोदी और शाह को तो हम जानते हैं, उन्हें तो "चोर" कहलाने में ही अपना स्वाभिमान महसूस होता है। मोदी तो दो मिनट में इंटरव्यू से भाग जाएगा, जैसे पहले भी कई बार कर चुका है।
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