ब्रेकिंग पॉइंट: मोदी, शाह और चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट घोटाले और साइबर अपराधों के लिए तुरंत गिरफ्तार किया जाए

 हर नागरिक से अपील इसे ज़रूर पढ़ें और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ

यह सिर्फ भारत के लोकतंत्र का सवाल नहीं है। यह पूरी दुनिया की स्थिरता और भविष्य का सवाल है। अगर हम एक सरकार को यह अनुमति दे देते हैं कि वह सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग करके चुनाव चुरा ले तो समझ लीजिए, अगला कदम होगा डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण। आज की दुनिया डेटा, डिजिटल पहचान और इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन से चलती है। जो सरकार इस व्यवस्था को हथिया लेती है, वह आपके अधिकार, आपका पैसा, आपका वोट आपकी पूरी ज़िंदगी छीन सकती है। अगर भारत में यह मॉडल चल गया, तो यह दुनिया भर में तानाशाही के लिए एक ब्लूप्रिंट बन जाएगा एक बार सत्ता पर कब्ज़ा, फिर कभी वापसी नहीं। इस लेख को जितना हो सके, फैलाइए। इसे पढ़िए, सोचिए, और दूसरों तक पहुँचाइए क्योंकि अब खामोश रहना आत्मघात है।

ब्रेकिंग पॉइंट: मोदी, शाह और चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट घोटाले और साइबर अपराधों के लिए तुरंत गिरफ्तार किया जाए

https://www.youtube.com/watch?v=U3LoPBLz9NM

https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/09/breaking-point-modi-shah-and-eci-must.html

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अब गुस्सा जताने का वक्त नहीं, अब कार्रवाई का वक्त है। भारत में लोकतंत्र की हत्या अब पर्दे के पीछे नहीं, खुल्लमखुल्ला हो रही है  सरकार की मिलीभगत से, संस्थाओं की चुप्पी से, और जनता की आंखों में धूल झोंक कर। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को अब सत्ता से हटाकर सीधे गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उनके साथ चुनाव आयोग के वे सभी अधिकारी भी जेल में होने चाहिए जिन्होंने इस आपराधिक षड्यंत्र को अंजाम दिया। यह प्रशासनिक चूक नहीं है, यह पूरी तरह से सुनियोजित देशद्रोह है।

हिंदू की रिपोर्ट ने इस साज़िश को एक्सपोज़ कर दिया है। 'गरुड़' नाम का एक ऐप, जिसे चुनाव आयोग की देखरेख में बनाया गया, का इस्तेमाल कांग्रेस समर्थक वोटरों को टारगेट करके वोटर लिस्ट से हटाने के लिए किया गया। यह तो इत्तेफाक था, ही कोई गलती  यह एक डिजिटल हमला था, लोकतंत्र के खिलाफ।

जब कर्नाटक CID ने इसकी जांच शुरू की, उन्हें ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक डेटा तक पहुंच ही नहीं दी गई। हिंदू की रिपोर्ट बताती है कि जो डिजिटल फाइलें इस अपराध की गवाही देतीं, उन्हें CID को देने से इनकार कर दिया गया। क्योंकि एक बार अगर वो फाइलें सार्वजनिक हो जातीं, तो पूरा खेल उजागर हो जाता  और मोदी, शाह, और ECI का अपराध खुलकर सामने जाता। इसलिए नहीं कि सच्चाई नहीं है, बल्कि इसलिए क्योंकि इन लोगों ने पूरे सिस्टम को बंदी बना लिया है। ये अब जांच के लायक नहीं रहे  ये अपराधी हैं, जो सत्ता का इस्तेमाल करके गिरफ्तारी से बच रहे हैं।

बिहार में 65 लाख वोटर एक झटके में वोटर लिस्ट से ग़ायब कर दिए गए। जवाब किसी के पास नहीं है। प्रशासन चुप है, चुनाव आयोग भाग रहा है, और सरकार मुँह फेर रही है। ये सिर्फ एक राज्य की बात नहीं  ये एक राष्ट्रीय रणनीति है: विपक्षी वोटरों को हटा दो, चुनाव का नतीजा बदल दो, और फिरजनता का जनादेशकहकर सत्ता पर काबिज़ रहो।

2023 में ऐसे कानून पास कर दिए गए जिन्होंने चुनाव आयोग को पूरी कानूनी छूट दे दी  अब वे किसी भी चुनावी अपराध के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। और जब ये कानून पास हो गए, उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी खुद CJI के घर गणेश पूजा के नाम पर पहुंचे। यह सिर्फ धार्मिक शिष्टाचार नहीं था  यह एक खुला संकेत था कि अब सुप्रीम कोर्ट भी नियंत्रण में है। जब संविधान की रक्षा करने वाली सबसे ऊँची कुर्सी पर बैठा इंसान चुप है, तो अपराधी क्यों डरें?

मीडिया का क्या कहना? गोदी मीडिया ने हर सबूत को दबाया, हर सवाल को मोड़ा, और जनता का ध्यान भटकाने के लिए झूठी कहानियाँ गढ़ीं। ये अब पत्रकार नहीं  सरकारी अपराध में शामिल सहयोगी हैं। इनका अपराध उतना ही बड़ा है जितना सत्ता में बैठे उनके मालिकों का। इनके लिए भी जेल का दरवाज़ा खुलना चाहिए।

यह अब किसी पार्टी की लड़ाई नहीं है। यह सवाल है कि क्या भारत अब भी लोकतंत्र है या सिर्फ दिखावे की एक डिजिटल तानाशाही बन चुका है, जहां वोटर लिस्ट से नाम मिटाकर सत्ता चुराई जाती है। अगर आज मोदी, शाह, चुनाव आयोग के अधिकारी और उनके मीडिया सहयोगी गिरफ्तार नहीं होते, तो समझ लीजिए  भारत अब जनता का नहीं रहा।

अब और जांच नहीं चाहिए। अब सीधी गिरफ़्तारी चाहिए। इन लोगों ने सिस्टम की हर जांच को कुचल दिया है, कानून को अपने हिसाब से मोड़ दिया है, और न्यायपालिका को नम्र बना दिया है। अगर इन लोगों को अभी हटाया और जेल में नहीं डाला गया, तो संविधान सिर्फ एक काग़ज़ का टुकड़ा रह जाएगा।

भारत किसी गिने-चुने व्यापारिक गिरोह का प्रोजेक्ट नहीं है। अगर इन अपराधियों को रोका नहीं गया, तो आम नागरिक का वोट, आवाज़ और अधिकार  सब कुछ मिटा दिया जाएगा। और हां, एक बात बिल्कुल साफ़ है: मोदी, शाह, चुनाव आयोग के उच्च अधिकारी और गोदी मीडिया के ये अपराधी अगर जेल नहीं जाते, तो समझिए जनता ने अपना देश खो दिया है।


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