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नव वर्ष की शुभकामनाएँ

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  नव वर्ष की शुभकामनाएँ हर साल यहाँ इस दुनिया में कुछ देकर हमको जाता है चाहे माँगो या ना माँगो कभी नया साल यहाँ चला आता है   ये साल भी कुछ ऐसा ही था दुनिया को हिला दिया है जिसने जो बातें कभी नहीं सोची थीं वो बातें भी हुईं इस दुनिया में   दुनिया के अब हर कोने में नफ़रत का बोल वहाँ बाँका है यहाँ मिलकर सबको लूट रहे कोई रोक नहीं इन्हें पाता है   चाहता हूँ ये आने वाला यहाँ ये साल हो अब अच्छा सबका थोड़ी नफ़रत कम हो जाए यहाँ नफ़रत को लगाएँ मिलकर झटका   हम आने वाली सब नस्लों को कह पाएँ हम कुछ ऐसा यहाँ नफ़रत जो कभी यहाँ आई थी उसे मिलकर कैसे भेजा वहाँ   अब सबसे दुआ मैं करता हूँ चलो मिलकर खुशियाँ मनाएँ हम ये जो साल अब आने वाला है मुहब्बत के गीत मिलकर गाएँ हम Nav Varsh Ki Shubhakaamanaen   Har saal yahan is duniya mein kuchh dekar hamko jaata hai chahe maango ya na maango kabhi naya saal yahan chala aata ...

सत्ता को गलत पढ़ना: पश्चिमी विस्मृति, आरएसएस और भारत की राजनीतिक यात्रा

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  सत्ता को गलत पढ़ना : पश्चिमी विस्मृति , आरएसएस और भारत की राजनीतिक यात्रा English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/12/misreading-power-western-amnesia-rss.html हाल के दिनों में The New York Times में प्रकाशित एक लेख को लेकर काफी चर्चा हुई है , जिसमें RSS ( आरएसएस ) के भारतीय संस्थानों पर बढ़ते प्रभाव को ऐसे पेश किया गया , मानो यह कोई नई या हाल ही में सामने आई सच्चाई हो खासकर पश्चिमी दर्शकों के लिए। कई स्वतंत्र पत्रकारों ने इस लेख का विश्लेषण इस तरह किया , जैसे आरएसएस अभी - अभी दृश्य में आई हो या उसने हाल के वर्षों में ही संस्थानों में पैठ बनाई हो। यह दृष्टिकोण मूल रूप से गलत है और एक गहरी ऐतिहासिक विस्मृति को उजागर करता है। आरएसएस न तो अचानक उभरी है और न ही उसका प्रभाव हाल में शुरू हुआ है। उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आज उसका व्यवहार नया नहीं है। वह आज भी उसी संरचनात्मक भूमिका में काम कर रही है , जिसमें वह ब्रि...