रुपये की गिरती कीमत, उसके कारण और उसे कैसे रोका जाए
रुपये की गिरती कीमत, उसके कारण और उसे कैसे रोका जाए
लेखक की भूमिका
यह
लेख मैंने रुपये
की डॉलर के मुकाबले गिरती कीमत
के बारे में
पहले लिखे गए लेख के
आगे लिखा है।
https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2025/12/blog-post_4.html
इस
लेख में हम विस्तार से समझते
हैं कि पिछले
कई सालों में
रुपये की कीमत क्यों गिरी,
भारतीय शासन प्रणाली
में कौन सी कमजोरियां इसे और बढ़ाती हैं,
और हम इस हालत को
कैसे सुधार सकते
हैं।
यह
लेख ऑनलाइन शोध,
आर्थिक रिपोर्टों और
सार्वजनिक डेटा पर
आधारित है। इसका
उद्देश्य लोगों को
सही जानकारी देना
है, न कि किसी तरह
की व्यक्तिगत राय
रखना।
1. परिचय
किसी
भी देश की मुद्रा उसकी
अर्थव्यवस्था की असल
हालत दिखाती है।
जब अर्थव्यवस्था मज़बूत
होती है, उत्पादन
बढ़ता है, लोगों
की खरीद क्षमता
संतुलित रहती है,
तब मुद्रा स्थिर
रहती है। लेकिन
जब ये आधार कमज़ोर पड़ते
हैं, मुद्रा गिरने
लगती है। पिछले
10–11 सालों में भारत
में यही हुआ।
रुपया
करीब 0.0176 डॉलर से
गिरकर 0.011 डॉलर पर
आ गया। यह सिर्फ एक
नंबर नहीं है,
बल्कि यह दिखाता
है कि हमारी
अर्थव्यवस्था के कई
हिस्सों में गहरी
समस्या है।
2. रुपये के गिरने
के मुख्य कारण
2.1 बढ़ता कर्ज और
कम फायदा
भारत
ने पिछले दशक
में बहुत तेज़ी
से कर्ज लिया।
कर्ज लेना गलत
नहीं है, लेकिन
वह कर्ज तभी
अच्छा है जब उससे देश
की उत्पादन क्षमता
बढ़े। पर भारत में कई
परियोजनाएँ खराब गुणवत्ता,
गडबड़ी या भ्रष्टाचार
की वजह से ठीक नतीजे
नहीं दे सकीं।
इसका सीधा असर
रुपये की कीमत पर पड़ा।
2.2 महंगाई बढ़ी, लेकिन
आय नहीं बढ़ी
जब
लोगों की आय न बढ़े
और चीजें महंगी
हों, तो असल में रुपया
कमज़ोर हो जाता है।
2.3 नीतियाँ छोटी कंपनियों के
खिलाफ, बड़ी कंपनियों के
पक्ष में
GST जैसी नीतियों
ने बड़ी कंपनियों
को आसानी दी,
लेकिन छोटे कारोबारियों
पर खर्च और झंझट बढ़ा
दिया। बिजली महंगी,
ईंधन महंगा, मजदूरों
की ट्रेनिंग कमजोर—इन सबने
उत्पादन को सीमित
किया।
उत्पादन कम होगा तो महंगाई
बढ़ेगी और रुपया
और गिरेगा।
2.4 बढ़ती असमानता
जब
पूरा बाजार एक
छोटे अमीर वर्ग
पर टिक जाता
है, तो कीमतें
असली मांग–आपूर्ति
के हिसाब से
नहीं, बल्कि “यह
लोग दे सकते हैं” के
आधार पर तय होने लगती
हैं। यह झूठी महंगाई है,
जो पूरी अर्थव्यवस्था
को हिला देती
है।
3. रियल एस्टेट की
कीमतें: छिपा हुआ बड़ा
कारण
3.1 अमीरों के हाथ
में धन और मकानों
की कीमतें
जैसे-जैसे धन
अमीरों के हाथ में केंद्रित
होता गया, उन्होंने
बड़े पैमाने पर
जमीन और मकान खरीदना शुरू
कर दिया। इससे
मकानों की कीमतें
असली जरूरतों से
कहीं ऊपर चली गईं।
मकान
अब “ज़रूरत” नहीं
बल्कि “निवेश की
चीज़” बन गए।
3.2 मकानों की महंगाई
से बाकी चीजों की
कीमतें भी बढ़ती हैं
जब
एक शहर में घर करोड़ों
में बिकने लगते
हैं, तो दुकानदार,
सेवा प्रदाता, मजदूर,
सब यह मानने
लगते हैं—
“अगर लोग इतने महंगे
घर खरीद सकते हैं,
तो महंगी चीज़ें भी
खरीद सकते हैं।”
3.3 रियल एस्टेट का
फटना रुपये की कमजोरी
का संकेत है
जब
एक देश की संपत्ति की कीमतें
उसकी लोगों की
आय से बहुत ऊपर निकल
जाती हैं, तो यह बताता
है कि:
यह
सीधे रुपये को
कमज़ोर बनाता है।
4. विदेशी कंपनियाँ रुपये
को कैसे देखती हैं
4.1 उदाहरण: भारत में Audi A4
4.2 इसका मतलब
जब
एक ही मुद्रा
अलग-अलग वर्गों
के लिए अलग कीमत रखती
है, तो वैश्विक
कंपनियाँ उसे भरोसेमंद
नहीं मानतीं।
5. खराब
उत्पादन व्यवस्था और उसका असर
कम
उत्पादन = अधिक आयात
= व्यापार घाटा = कमजोर
रुपया
6. दिल्ली का उदाहरण:
कैसे सही नीतियाँ बदलाव
ला सकती हैं
6.1 AAP सरकार का मॉडल
2013 में AAP सरकार
ने शिक्षा, स्वास्थ्य,
ईमानदार शासन, और
निचले वर्ग की क्रय क्षमता
पर ध्यान दिया।
6.2 शिक्षा में सुधार
6.3 भ्रष्टाचार पर रोक
भ्रष्टाचार
कम हुआ, जिससे
सरकारी पैसे का असर बढ़ा।
6.4 निचले वर्ग की
खरीद क्षमता बढ़ी
6.5 नतीजे
Delhi ने दिखाया
कि नीतियाँ सही
हों तो अर्थव्यवस्था
जल्दी सुधर सकती
है।
7. भारत इसे कैसे
सुधार सकता है: समाधान
7.1 छोटे उद्योगों का
जाल बनाना
छोटे
उद्योग सबसे ज्यादा
रोजगार देते हैं।
इनके लिए अलग हब, साफ़
निगरानी और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था
ज़रूरी है।
7.2 सस्ती और स्थिर
बिजली
उत्पादन
तभी बढ़ता है
जब बिजली सस्ती
हो।
7.3 उद्योग आधारित ट्रेनिंग
हुनर
सीखने का सिस्टम
सिर्फ किताबों से
नहीं, बल्कि असली
काम से जुड़ा
होना चाहिए।
7.4 भ्रष्टाचार से बचाना
डिजिटल
रिकॉर्ड और पारदर्शी
भुगतान छोटे उद्योगों
की कमाई बचाते
हैं।
7.5 पुनर्निवेश पर प्रोत्साहन
जो
कंपनियाँ मजदूरों की तनख्वाह
बढ़ाती हैं, मशीनें
सुधारती हैं, उन्हें
प्रोत्साहन मिले।
7.6 उत्पादन बढ़ाकर महंगाई घटाना
जितना
ज्यादा उत्पादन, उतनी
कम महंगाई।
7.7 आयात पर निर्भरता
कम करना
भारतीय
निर्माण बढ़ेगा तो
व्यापार घाटा कम होगा और
रुपया मज़बूत होगा।
7.8 काम में गुणवत्ता
और ईमानदारी की संस्कृति बनाना
उत्पादन
तब तक बेहतर
नहीं होगा जब तक कंपनियाँ
गुणवत्ता और इंसाफ
को प्राथमिकता न
दें।
8. निष्कर्ष
दिल्ली
का उदाहरण दिखाता
है कि सही निवेश, साफ
शासन, शिक्षा में
सुधार, और छोटे उद्योगों को मज़बूत
करके अर्थव्यवस्था स्थिर
हो सकती है और रुपया
भी मज़बूत हो
सकता है।
जब
देश के हर वर्ग को
आगे बढ़ने का
मौका मिलता है,
तभी मुद्रा मज़बूत
बनती है।
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