जो झुके नहीं वही जीते हैं

 

जो झुके नहीं वही जीते हैं


इस दिल से जो टकरा जाते,
वो याद हमेशा रहते हमको,
खुशियों में शामिल हम हो ना हों,
पर ग़म में तू आवाज़ लगा हमको।

 

जीवन में कुछ ऐसी घड़ियाँ,
सबके जीवन में आती हैं,
जो ठान लेते हैं कुछ करने को,
राहों से पलट चली जाती हैं।

 

ये दुनिया है शेरों के लिए,
मर्ज़ी अपनी से जो जीते हैं,
कायरों को तो जीने में डर लगता,
वो बस दर्द के घूँट यहाँ पीते हैं।

 

हम आग का शोला बन के यहाँ,
भिड़ जाते हैं तूफ़ानों से,
मरना-जीना तो सब चलता है,
मरने से नहीं हम कभी डरते।

 

अंधकार भरी इस दुनिया में,
सूरज का सवेरा होता है,
काँटों से भरी हर डाली पे,
फूलों का बसेरा होता है।

 

फूलों से मोहब्बत भँवरों को
हो जाती है हर बगिया में,
काँटों से गिला तो रहता है,
चुभ जाते हैं वो हर दिल में।

 

अगर काँटों से मोहब्बत हो जाए,
तब डर नहीं लगता है जीने में,
ग़म भी खुशियाँ तब बन जाते,
रहते हैं फिर हम मस्ती में।

 

जीने का मज़ा भी तब आता,
जब जीते हैं अपनी मर्ज़ी से,
यारों के लिए हम यार यहाँ,
भिड़ जाते हैं दुनिया में उनके लिए।

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