अयोध्या के राम मंदिर को किसने लूटा?
अयोध्या
के राम मंदिर को किसने लूटा?
शायद इससे भी बड़ा सवाल यह
नहीं है कि राम मंदिर को किसने लूटा, बल्कि यह है कि इस पूरे मामले की जांच ही इतने
सवाल क्यों खड़े कर रही है? यदि समाचार रिपोर्टें सही हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार ने
राम मंदिर से जुड़ी कथित चोरी या वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच
दल (SIT) का गठन किया है, तो सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है:
आख़िर SIT किस अपराध की जांच
कर रही है? भारतीय दंड प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी चोरी की जांच सामान्यतः एफ़आईआर
(First Information Report) दर्ज होने के बाद ही शुरू होती है। एफ़आईआर वह कानूनी आधार
है जिसके बाद साक्ष्य एकत्र किए जाते हैं, संदिग्धों से पूछताछ होती है, गिरफ्तारियाँ
होती हैं और अंततः मुकदमा चलता है।
इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक
को यह पूछने का अधिकार है क्या इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की गई? यदि दर्ज की गई, तो
वह सार्वजनिक क्यों नहीं है? यदि दर्ज नहीं की गई, तो क्यों नहीं?
यह कोई राजनीतिक प्रश्न नहीं
है।
यह कानून के शासन (Rule of
Law) का प्रश्न है।
देश का हर नागरिक जानता है
कि यदि किसी आम व्यक्ति के घर से जेवर चोरी हो जाएँ, किसी दुकान से नकदी गायब हो जाए,
या किसी व्यापारी की संपत्ति चोरी हो जाए, तो पुलिस सबसे पहले एफ़आईआर दर्ज करने की
बात करती है।
तो फिर जब मामला देश के सबसे
महत्वपूर्ण और सबसे समृद्ध धार्मिक स्थलों में से एक का हो, तब कानून का वही नियम लागू
क्यों नहीं होना चाहिए?
यदि वास्तव में SIT गठित की
गई है, तो जनता को पूरी पारदर्शिता के साथ बताया जाना चाहिए
- आखिर चोरी क्या हुई?
- कथित रूप से कितनी संपत्ति गायब हुई?
- यह कब पता चला?
- इसकी सूचना किसने दी?
- उस संपत्ति की जिम्मेदारी किसके पास थी?
- क्या उन सभी लोगों से पूछताछ की गई जिनके
पास मंदिर की संपत्ति तक पहुँच थी?
- क्या कोई सामान बरामद हुआ?
- क्या किसी को जांच पूरी होने तक पद से हटाया
गया?
- और सबसे महत्वपूर्ण अब तक जनता को पूरी
जानकारी क्यों नहीं दी गई?
ये प्रश्न किसी धर्म के विरोध
में नहीं हैं।
ये जवाबदेही
(Accountability) के पक्ष में हैं।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं
की आस्था और उनके योगदान से बना है। लाखों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई इसलिए दान की
क्योंकि उन्हें विश्वास था कि वे एक पवित्र कार्य में योगदान दे रहे हैं।
उस विश्वास के साथ एक बहुत
बड़ी जिम्मेदारी भी आती है।
मंदिर में चढ़ाया गया प्रत्येक
रुपया, प्रत्येक स्वर्ण आभूषण, प्रत्येक चांदी का दान और प्रत्येक मूल्यवान वस्तु नैतिक
रूप से उन श्रद्धालुओं की संपत्ति है जिन्होंने उसे श्रद्धा से अर्पित किया।
यदि ऐसी किसी संपत्ति में चोरी
या वित्तीय अनियमितता की आशंका उत्पन्न होती है, तो उसका सबसे ईमानदार उत्तर केवल एक
है
पूर्ण पारदर्शिता।
दुर्भाग्य से आज भारत में धर्म
और राजनीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुके हैं।
वर्षों तक राम मंदिर भारतीय
राजनीति का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा। चुनाव दर चुनाव इसे जनता की भावनाओं से
जोड़कर प्रस्तुत किया गया। करोड़ों लोगों से दान एकत्र किया गया। इसे केवल धार्मिक
नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अभियान के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
ऐसी स्थिति में यदि अब किसी
प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चोरी के आरोप सामने आते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी
और भी बढ़ जाती है।
जांच केवल निष्पक्ष होनी ही
नहीं चाहिए
बल्कि जनता को निष्पक्ष दिखाई
भी देनी चाहिए।
जब महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक
नहीं की जाती, तो स्वाभाविक रूप से संदेह जन्म लेते हैं।
और संदेह किसी के हित में नहीं
होते
न श्रद्धालुओं के।
न मंदिर के।
न सरकार के।
और न ही उस आस्था के जिसके
नाम पर यह मंदिर बनाया गया।
इन संदेहों को समाप्त करने
का एक ही तरीका है
राजनीतिक भाषण नहीं।
तथ्य।
यदि एफ़आईआर दर्ज हुई है, तो
उसे सार्वजनिक किया जाए।
यदि दर्ज नहीं हुई, तो उसका
कारण बताया जाए।
SIT की जांच पूरी होने पर उसकी
रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
देश को बताया जाए कि वास्तव
में हुआ क्या था।
आस्था कभी पारदर्शिता से नहीं
डरती।
सवालों से वही डरता है जिसके
पास छिपाने के लिए कुछ होता है।
कोई व्यक्ति भगवान राम को ईश्वर
मानता है, कोई उन्हें आदर्श राजा मानता है, तो कोई उन्हें भारतीय साहित्य का महान चरित्र
मानता है। यह प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था का विषय है।
लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं
द्वारा दिए गए दान का प्रबंधन व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं है।
वह सार्वजनिक जवाबदेही का विषय
है।
करोड़ों लोगों ने अपना विश्वास
और अपनी मेहनत की कमाई उन लोगों के हाथों में सौंपी जिन्हें इस मंदिर की देखभाल की
जिम्मेदारी दी गई।
वे केवल नारों के हकदार नहीं
हैं।
वे उत्तर के हकदार हैं।
और जब तक वे उत्तर नहीं दिए
जाते, तब तक यह प्रश्न देशभर में गूंजता रहेगा
आख़िर अयोध्या के राम मंदिर
को किसने लूटा, और देश को अब तक पूरी सच्चाई क्यों नहीं बताई गई?
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