भारत के प्रत्येक नागरिक से एक विनम्र अपील

 

भारत के प्रत्येक नागरिक से एक विनम्र अपील

English Version: https://rakeshinsightfulgaze.blogspot.com/2026/08/an-appeal-to-every-citizen-of-india.html

यदि आप मानते हैं कि प्रत्येक लोकसेवक, चाहे वह किसी भी पद पर आसीन हो, कानून के समक्ष समान रूप से उत्तरदायी होना चाहिए, तो मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि संलग्न पत्र को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

यह पत्र माननीय सर्वोच्च न्यायालय से किसी पूर्व निर्धारित निष्कर्ष पर पहुँचने का अनुरोध नहीं करता। यह केवल इतना निवेदन करता है कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा अपने निर्वाचन शपथपत्रों में घोषित शैक्षणिक योग्यताओं का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए, ताकि सत्य की स्थापना कानून के अनुसार हो सके।

निर्वाचन शपथपत्र शपथपूर्वक प्रस्तुत किए जाने वाले आधिकारिक दस्तावेज़ हैं। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उनमें किए गए प्रत्येक घोषणा सत्य और प्रमाणित करने योग्य हों। यदि ऐसे घोषणाओं से जुड़े प्रश्न वर्षों तक अनुत्तरित बने रहते हैं, तो नागरिकों के लिए यह स्वाभाविक और उचित है कि वे न्यायपालिका से निष्पक्ष सत्यापन की अपेक्षा करें।

यदि इस पत्र को पढ़ने के बाद आपको भी लगता है कि इस विषय पर स्वतंत्र न्यायिक विचार आवश्यक है, तो मैं आपसे विनम्र अनुरोध करता हूँ कि इस पत्र की एक प्रति प्रिंट करें, उस पर अपने हस्ताक्षर, नाम और पता लिखें, तथा उसे भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय को भेजें। प्रत्येक व्यक्ति केवल वही पत्र भेजे जो उसके अपने विचार, विवेक और विश्वास का प्रतिनिधित्व करता हो।

यह किसी राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में किया गया अभियान नहीं है। यह पारदर्शिता, कानून के समान अनुप्रयोग तथा हमारी संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को सुदृढ़ करने का एक शांतिपूर्ण और संवैधानिक प्रयास है।

लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का अधिकार ही नहीं, बल्कि दायित्व भी है कि वह शांतिपूर्ण और संवैधानिक माध्यमों से जवाबदेही की माँग करे। यदि पर्याप्त संख्या में नागरिक सत्य की स्थापना का आग्रह करेंगे, तो हमारी संवैधानिक संस्थाओं को संविधान और कानून के अनुरूप इस विषय का निष्पक्ष समाधान करने का अवसर मिलेगा।

जय हिन्द।

 

सेवा में,
माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश महोदय
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
तिलक मार्ग, नई दिल्ली – 110001

दिनांक: ___ / ___ / 2026

विषय: श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने निर्वाचन शपथपत्रों में घोषित शैक्षणिक योग्यताओं के सत्यापन हेतु निवेदन।

माननीय महोदय,

मैं सविनय यह निवेदन आपके विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

वैधानिक निर्वाचन शपथपत्रों में किए गए घोषणाओं से संबंधित प्रश्न अंततः निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा संवैधानिक शासन व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़े होते हैं। जब ऐसे प्रश्न लंबे समय तक अनिर्णीत बने रहते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वे निरंतर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में केवल कानून के अनुसार किया गया एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्णय ही इस विषय को अंतिम रूप से स्पष्ट कर सकता है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को सुदृढ़ कर सकता है।

हाल ही में आपने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की बढ़ती समस्या तथा उनसे सार्वजनिक संस्थाओं को होने वाले संभावित नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। आपके ये विचार इस बात के महत्व को रेखांकित करते हैं कि कानून के अंतर्गत किए गए प्रत्येक घोषणा-पत्र सत्य हों तथा उनका सत्यापन संभव हो।

श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दायर निर्वाचन शपथपत्रों, जिनमें वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का शपथपत्र भी शामिल है, के अनुसार उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (Bachelor's Degree) तथा गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (Master's Degree) प्राप्त करने की घोषणा की है। ये घोषणाएँ वैधानिक निर्वाचन शपथपत्रों में शपथपूर्वक की गई हैं तथा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सार्वजनिक अभिलेख का हिस्सा बनाई गई हैं।

मैं यह समझता हूँ कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत शैक्षणिक अभिलेखों तक पहुँच से संबंधित पूर्ववर्ती कार्यवाहियों में यह कहा गया था कि ऐसे अभिलेख व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में आते हैं। तथापि, मेरा विनम्र निवेदन है कि जब कोई अभ्यर्थी स्वयं अपनी शैक्षणिक योग्यताओं की घोषणा वैधानिक निर्वाचन शपथपत्र में स्वेच्छा से करता है, तो उसकी स्थिति भिन्न हो जाती है। निर्वाचन आयोग के समक्ष विधिसम्मत दस्तावेज़ में शपथपूर्वक की गई ऐसी घोषणाएँ सार्वजनिक अभिलेख का हिस्सा बन जाती हैं और वैध सार्वजनिक परीक्षण के योग्य होती हैं।

यह निवेदन इस प्रश्न से संबंधित नहीं है कि किसी सार्वजनिक पद पर आसीन होने के लिए विश्वविद्यालय की डिग्री आवश्यक है या नहीं। यह केवल निर्वाचन शपथपत्रों में शपथपूर्वक किए गए घोषणाओं की सत्यता एवं सत्यापन-योग्यता से संबंधित है। निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता इसी सिद्धांत पर आधारित है कि कानून द्वारा अपेक्षित प्रत्येक घोषणा सत्य हो तथा वही कानूनी मानदंड प्रत्येक अभ्यर्थी पर समान रूप से लागू हो, चाहे वह किसी भी सार्वजनिक पद पर आसीन क्यों न हो।

यह विषय कई वर्षों से सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। विधि के अधिकार के अंतर्गत किया गया एक स्पष्ट एवं स्वतंत्र सत्यापन या तो इन घोषणाओं की सत्यता की पुष्टि करेगा अथवा इस विषय में बनी हुई किसी भी शंका का अंत करेगा। दोनों ही स्थितियों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

अतः मैं सविनय प्रार्थना करता हूँ कि यह माननीय न्यायालय, यदि उचित समझे, तो इस विषय का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेने अथवा श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने निर्वाचन शपथपत्रों में घोषित शैक्षणिक योग्यताओं के स्वतंत्र सत्यापन के लिए आवश्यक एवं उपयुक्त निर्देश जारी करने तथा उस सत्यापन के परिणाम को सार्वजनिक अभिलेख पर रखने पर विचार करे।

संविधान तथा विधि के शासन के संरक्षक के रूप में यह माननीय न्यायालय इस प्रश्न का कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय करने की विशिष्ट संवैधानिक स्थिति में है। ऐसा निष्पक्ष न्यायिक निर्णय इस संवैधानिक सिद्धांत को और अधिक सुदृढ़ करेगा कि कानून के प्रति उत्तरदायित्व प्रत्येक सार्वजनिक पद पर समान रूप से लागू होता है।

मेरे इस निवेदन पर कृपापूर्वक विचार करने के लिए मैं आपका हृदय से आभारी रहूँगा।

भवदीय,

हस्ताक्षर: _______________________

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पिता का नाम: ____________________

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जिला: ___________________________

राज्य: __________________________

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