राहुल गांधी ने भाजपा की अपनी ही ‘पप्पू’ वाली रणनीति मोदी के खिलाफ इस्तेमाल करनी शुरू कर दी है
राहुल गांधी ने भाजपा की अपनी ही ‘पप्पू’ वाली रणनीति मोदी के खिलाफ इस्तेमाल करनी शुरू कर दी है
19 सितंबर
को राहुल गांधी ने इंदौर में
एक रैली की, जहाँ
उन्होंने छात्रों की समस्याओं और
इस सरकार की नाकामियों को
उठाया। राहुल समझ चुके हैं
कि मोदी को कमजोर
करने का एक तरीका
उन्हें सार्वजनिक रूप से उन्हीं
के शब्दों और कामों के
जरिए कटघरे में खड़ा करना
है। यही तकनीक भाजपा
ने अपने आईटी सेल
के जरिए राहुल को
‘पप्पू’ बताकर इस्तेमाल की थी। फर्क
यह है कि राहुल
अब मोदी की प्रधानमंत्री
पद के लिए योग्यता
पर सवाल उठा रहे
हैं और उनकी सरकार
पर भारत तथा भारतीयों
की संपत्ति और गरिमा छीनने
का आरोप लगा रहे
हैं। यह राजनीति की
एक पुरानी रणनीति है, लेकिन राहुल
इसे अपने अंदाज़ में
इस्तेमाल कर रहे हैं।
राहुल
मोदी के बोलने के
तरीके, विश्व नेताओं से उनकी मुलाकातों
और अपनी शिक्षा को
लेकर दिए गए उनके
बयानों को ही उनकी
नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने
का आधार बना रहे
हैं। मोदी अपनी बातों
से ऐसा आभास देते
हैं मानो औपचारिक स्कूली
शिक्षा प्राप्त न करना कोई
मायने ही नहीं रखता।
ऐसे में छात्रों के
बीच राहुल की बात और
अधिक असर पैदा करती
है। रोजगार पैदा करने, परीक्षा
के पेपर लीक रोकने
और राजनीतिक परिवारों से जुड़े लोगों
को ऊँचे तथा प्रमुख
पदों पर पहुँचाने की
प्रवृत्ति पर सवालों का
जवाब देने में सरकार
की नाकामी राहुल के संदेश को
आम जनता से जोड़ती
है।
मेरा
मानना है कि मोदी
को यह चिंता भी
सता रही होगी कि
अगर सत्ता उनके हाथ से
निकल गई, तो अगली
सरकार उनके और उनके
दोस्तों के साथ वैसा
नरम व्यवहार नहीं करेगी, जैसा
वे शायद उम्मीद करते
हैं। जैसा बोओगे, वैसा
काटोगे यह कहावत हम
सब अच्छी तरह जानते हैं।
अब कर्मों का हिसाब मोदी
के सामने खड़ा दिखाई देता
है और उनके पसीने
छुड़ा रहा है। भाजपा
समर्थकों के विपक्ष पर
किए गए हमले टिकते
नज़र नहीं आ रहे,
जबकि विपक्ष के सवाल सीधे
मोदी और शाह पर
चोट कर रहे हैं।
इन
रैलियों में छात्रों की
जो दर्दनाक कहानियाँ सामने आ रही हैं,
वे इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल
मीडिया माध्यमों से लाखों लोगों
तक पहुँच रही हैं। ये
अब केवल राजनीतिक भाषण
नहीं रह गए हैं।
ये उन युवा भारतीयों
की कहानियाँ हैं जो पेपर
लीक, बेरोजगारी और एक ऐसी
सरकार से जूझ रहे
हैं जिसे वे अपनी
समस्याओं के लिए जिम्मेदार
मानते हैं। जैसे-जैसे
ये कहानियाँ फैल रही हैं,
लोग छात्रों के अनुभवों को
मोदी के नेतृत्व पर
राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे
सवालों से जोड़ रहे
हैं।
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