पुलिस, अपना कर्म करो: कानून का पालन ही तुम्हारा सच्चा धर्म है
पुलिस, अपना कर्म करो: कानून का पालन ही तुम्हारा सच्चा धर्म है
इस
धरती पर बहुत कम
देश हैं जो भगवद्गीता
की शिक्षाओं के अनुसार जीते
हैं, और भारत निश्चित
रूप से उनमें से
एक नहीं है। भारत
के पास एक ऐसा
नेता है जिसके कर्म
अर्जुन से ज़्यादा रावण
जैसे दिखाई देते हैं। जब
भी वह माथे पर
एक बड़ा-सा तिलक
लगाता है और साधु
की तरह वेश धारण
करता है, उस दिन
यह साफ़ हो जाता
है कि वह देश
के खिलाफ कुछ न कुछ
कर रहा होगा। जब
वह एक गुफा में
साधु की तरह वेश
धारण करके ध्यान कर
रहा था और उस
पर 100 मीडिया कैमरे लगे हुए थे,
तभी यह स्पष्ट हो
गया था कि सत्ता
में बने रहने के
लिए वह राष्ट्रीय चुनाव
में धांधली कर रहा था।
मुझे
एक घटना याद आती
है जब मिनेसोटा के
गवर्नर श्री एर्नी कार्लसन
किसी को लेने के
लिए एयरपोर्ट जा रहे थे।
एक पुलिसकर्मी ने उन्हें रोका
और तेज़ गति से
गाड़ी चलाने के कारण उनका
चालान कर दिया। ड्यूटी
पर मौजूद उस पुलिसकर्मी ने
वही किया जो उसके
धर्म ने उससे करने
को कहा था। उस
समय वह वास्तव में
भगवद्गीता की शिक्षाओं के
अनुसार अपना कर्म कर
रहा था।
1975 में इलाहाबाद
हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन
लाल सिन्हा ने श्रीमती गांधी
के पद की परवाह
किए बिना, अपनी अदालत में
पेश किए गए तथ्यों
के आधार पर फैसला
सुनाया। उस समय उन्होंने
भगवद्गीता की शिक्षाओं के
अनुसार अपना धर्म निभाया।
आज
भारत में पुलिस कानून
के अनुसार काम नहीं करती;
बल्कि अपराधियों को बचाने के
लिए काम करती है।
जब मोहन भागवत दुनिया
भर में घूमकर अपनी
श्रेष्ठता दिखाते हैं और विश्वगुरु
की तरह दिखना चाहते
हैं, तो यह आदमी
कभी विश्वगुरु नहीं हो सकता,
क्योंकि उसके कर्म साफ़
बताते हैं कि उसकी
शिक्षाएँ और उसके कर्म
आपस में मेल नहीं
खाते। वह एक नफ़रत
से भरा हुआ व्यक्ति
है जो नैतिक रूप
से भ्रष्ट है।
पुलिस
का काम ज्ञानेश कुमार
को गिरफ्तार करना और न्याय
व्यवस्था को उनके अपराधों
की जाँच करने देना
है, ताकि फैसला तथ्यों
के आधार पर हो
न कि उन लोगों
को गिरफ्तार करना जो उन
पर आरोप लगा रहे
हैं और उन्हें पद
से हटाने की माँग करते
हुए प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनके कर्मों ने लाखों लोगों
को पीड़ा पहुँचाई है, और इसलिए
उनके खिलाफ कार्रवाई न करके पुलिस
भी पुलिस के धर्म के
अनुसार अपना कर्तव्य निभाने
में असफल हो रही
है। FIR दर्ज करो और
उन्हें जल्द से जल्द
गिरफ्तार करो।
भारत
को दुनिया को भगवद्गीता के
सिद्धांत सिखाना बंद करना चाहिए।
पहले खुद उन सिद्धांतों
के अनुसार जीना शुरू करो।
दुनिया अपने आप जान
जाएगी कि भगवद्गीता क्या
सिखाती है तुम्हें दुनिया
भर में घूमकर उसकी
शिक्षाओं का बखान करने
की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
Comments
Post a Comment