क्या रावण उन लोगों से अधिक मर्यादित था जो राम की पूजा करने का दावा करते हैं?
क्या रावण उन लोगों से अधिक मर्यादित था जो राम की पूजा करने का दावा करते हैं?
मुझे पूरा यक़ीन है कि जब लोग इस शीर्षक को पढ़ेंगे, तो वे मुझसे सवाल करेंगे कि मैंने यह लेख क्यों लिखा और ऐसा शीर्षक क्यों दिया। हर दिन भारत से बलात्कार के मामलों की ख़बरें आती हैं। दिल्ली में DU की लड़कियाँ बलात्कार के डर से शाम 6 बजे के बाद अपने घरों या हॉस्टलों से बाहर निकलने से डरती हैं। मैं बचपन से रामायण पढ़ता आया हूँ, और रामायण में रावण ने सीता का अपहरण किया, उन्हें रहने के लिए अलग जगह दी, उनकी देखभाल के लिए सेविकाएँ दीं और कभी भी उनके साथ ज़बरदस्ती नहीं की। रामायण की कहानी के अनुसार, वह अपने समय का सबसे शक्तिशाली राजा था, फिर भी उसने इस तरह का कोई काम करके खुद को शर्मसार नहीं किया।
वह एक अमीर और शक्तिशाली राजा था, और उसके राज्य के लोग उसके शासन में रहते थे। रामायण में ऐसा कुछ नहीं मिलता जिससे यह लगे कि उसके राज्य में हर कोई दुखी था। यहाँ हमारे पास भाजपा की सरकार है, जहाँ प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया गया है कि उनका नाम Epstein Files में है, और उनकी यात्राओं तथा संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मोदी पर आरोप लगाए गए हैं और जहाँ तक मैंने देखा है, उन्होंने इन आरोपों के ख़िलाफ़ सार्वजनिक रूप से अपना बचाव करने के लिए कुछ नहीं किया है। मेरी राय में, जब भारत के प्रधानमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो देश की जनता जवाब की हक़दार है।
भाजपा में और उससे जुड़े लोगों में ऐसे व्यक्ति रहे हैं जिन्हें बलात्कार और दूसरे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया है। जब बिलकिस बानो मामले में दोषी ठहराए गए अपराधियों को उनकी सज़ा पूरी होने से पहले छोड़ दिया गया, तो उनका मिठाइयों और मालाओं से स्वागत किया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी समय से पहले रिहाई को रद्द कर दिया और सभी 11 दोषियों को वापस जेल जाने का आदेश दिया। और यही वे लोग हैं जो राम की पूजा करने का दावा करते हैं।
ऐसे लोगों से बात करने के बाद, जो खुद को इन ठगों द्वारा ठगा हुआ महसूस करते हैं, कम से कम मैं इतना तो कह सकता हूँ कि मेरी राय में भाजपा नैतिकता वाली पार्टी नहीं है। मुझे समझ नहीं आता कि हम दशहरे पर रावण का पुतला क्यों जलाते हैं। इसकी जगह हमें प्रतीकात्मक रूप से उन दोषी बलात्कारियों की तस्वीरें जलानी चाहिए, जिन्हें हमने राजनीति से जुड़े लोगों द्वारा संरक्षण या सम्मान पाते देखा है, ताकि हर कोई देख सके कि ऐसे बलात्कारी समाज की निंदा के अलावा और किसी चीज़ के हक़दार नहीं हैं।
हाँ, कुछ लोग शायद इन लोगों को सीधे सज़ा देना चाहें, लेकिन यह काम न्याय व्यवस्था का है और हम क़ानून अपने हाथ में नहीं ले सकते। जिन लोगों ने ऐसे अपराध किए हैं, उन्हें न्याय व्यवस्था के माध्यम से और क़ानून के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए।
तो सवाल अब भी वही है: क्या रावण मर्यादा पुरुषोत्तम था या नहीं? इसका जवाब मैं पाठकों पर छोड़ता हूँ।
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