मोदी, कहाँ हो तुम? राहुल इंतज़ार कर रहे हैं और घड़ी की सुइयाँ चल रही हैं!
मोदी, कहाँ हो तुम? राहुल इंतज़ार कर रहे हैं और घड़ी की सुइयाँ चल रही हैं!
राहुल
गांधी ने एक बार
फिर मोदी को याद
दिलाया है कि खुली
बहस की चुनौती दिए
हुए 24 घंटे और बीत
चुके हैं। सवाल अब
भी वही है: मोदी
जी, कहाँ हो तुम?
राहुल इंतज़ार कर रहे हैं
कि मोदी सामने आएँ,
उनसे बहस करें और
बिना सबूत आरोप लगाना
बंद करें। राहुल ने विदेशी ताक़तों
के प्रभाव को लेकर मोदी
को चुनौती दी है और
उनका कहना है कि
वे मोदी के सत्ता
में रहते हुए किए
गए कामों के सबूत पेश
करने के लिए तैयार
हैं। कम से कम
एक बार तो देश
को दोनों पक्षों की बातें सुनने
और गोदी मीडिया के
रोज़ाना परोसे जाने वाले भाषणों
की जगह सच्चाई की
एक ख़ुराक मिलने का मौक़ा मिलेगा,
बशर्ते गोदी मीडिया वहाँ
आने और इसे दिखाने
की हिम्मत करे।
पिछले
दो दिनों से मोदी इतने
ख़ामोश हैं कि मुझे
तो शक होने लगा
है कि कहीं उन्हें
अपनी आवाज़ भी सुनाई देना
बंद तो नहीं हो
गई। शायद वे अपने
कमरे से एक फुसफुसाहट
भी बाहर नहीं जाने
देना चाहते, कहीं किसी को
पता न चल जाए
कि वे कहाँ छिपे
बैठे हैं। जब कोई
प्रधानमंत्री बिना सबूत विपक्ष
पर विदेशी ताक़तों से पैसा लेने
के आरोप लगाता है,
तो उसे अपने विदेशी
संबंधों पर उठने वाले
सवालों के जवाब देने
के लिए भी तैयार
रहना चाहिए। मेरी नज़र में
मोदी ने ट्रंप और
दूसरे विश्व नेताओं के सामने कई
बार दब्बूपन दिखाया है, लेकिन जब
किसी राजनीतिक मंच से विपक्ष
पर हमला करना होता
है, तो शेर बन
जाते हैं। उन्हें यह
समझ लेना चाहिए था
कि राहुल उनके आरोपों को
चुनौती देंगे और उनसे जवाब
माँगेंगे।
मेरा
मानना है कि विदेशी
पैसों के प्रभाव, मोदी
के राजनीतिक संबंधों और उनकी सरकार
के फ़ैसलों पर उठ रहे
सवालों की खुली जाँच
और चर्चा होनी चाहिए। अगर
मोदी के पास छिपाने
के लिए कुछ नहीं
है, तो राहुल की
चुनौती स्वीकार करके अपना पक्ष
क्यों नहीं रखते? राहुल
कह रहे हैं कि
उनके पास सबूत हैं,
और देश को उन
सबूतों को परखने का
मौक़ा मिलना चाहिए, न कि एक
बार फिर आरोपों और
भाषणों का तमाशा देखना
पड़े।
यह
चुनौती कुछ दिनों बाद
यूँ ही ग़ायब नहीं
हो जानी चाहिए। मैं
तो कल्पना कर सकता हूँ
कि दिल्ली में एक बहुत
बड़ी घड़ी लगा दी
जाए, जो यह दिखाती
रहे कि राहुल की
चुनौती के बाद कितने
घंटे बीत चुके हैं,
और उसके ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में
लिखा हो: “मोदी जी,
कहाँ छिपे हो?” एक
यूट्यूब चैनल भी बनाया
जा सकता है, जहाँ
मोदी के भाषण, भाजपा
के दावे, उनकी सच्चाई जाँचने
के लिए उपलब्ध सबूत
और राहुल की बहस की
चुनौती लगातार दिखाई जाए। इससे लोगों
को राजनीतिक वादों की तुलना वास्तविक
रिकॉर्ड से करने का
मौक़ा मिलेगा।
मोदी जी, घड़ी की सुइयाँ चल रही हैं। राहुल इंतज़ार कर रहे हैं। देश जवाब माँग रहा है। आख़िर कब तक बहस से बचते रहोगे?

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